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Lalitpur News: गुरुद्वारा साहिब में धूमधाम से मनाई गई बैसाखी

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अमर उजाला ब्यूरो
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ललितपुर। श्री गुरु सिंह सभा के तत्वावधान में बैसाखी पर्व श्रद्धा भाव से गुरुद्वारा लक्ष्मीपुरा साहिब में मनाया गया। दिल्ली से पधारे संत मनी सिंह ने कहा कि आज ही के दिन 1699 में गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब पंजाब में खालसा पंथ की स्थापना कर पंज प्यारों को अमृत छकाया व उन्हीं से अमृत छक कर सिंह की उपाधि दी।
उन्होंने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना करने से पहले आम सभा बुलाकर पूछा कि कौन अपने सिर का बलिदान दे सकता है। इस बात को सुनते ही भीड़ में सन्नाटा छा गया तभी पहला हाथ आगे आया ओर वो हाथ भाई दया सिंह का था। तब गुरु गोबिंद सिंह महाराज उन्हें तंबू के पीछे ले गए और थोड़ी देर बाद उनकी तलवार पर खून लगा हुआ था। इसके बाद भाई धर्म सिंह, भाई मोहकम सिंह, भाई हिम्मत सिंह, भाई साहिब सिंह सिर कटवाने तंबू के पीछे चले गए। कुछ समय के बाद ये पांचों गुरु जी के साथ निकल कर आए और कहा कि आज के बाद हर सिख अपने नाम के साथ सिंह लगाएगा।
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गुरु गोविंद सिंह जो कि गोविंद राय थे, उन्होंने अपने आप को आज ही के दिन से गोविंद सिंह कहना शुरू कर दिया। इस अवसर पर सुबह शुरू हुए गुरुद्वारा साहिब में श्री अखंडपाठ साहिब का समापन व निशान साहिब के चोले की सेवा और लंगर की सेवा पर्सन सिंह परमार की ओर से हुई। संचालन महामंत्री सुरजीत सिंह सलूजा ने किया।


गुरबाणी कीर्तन... सम्मानित किए गए बच्चे
मास्टर अक्षय गीतमा तिवारी व कर्मन दीप सिंह और हरजस कौर ने गुरबाणी कीर्तन का गायन किया। गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा व महामंत्री सुरजीत सिंह सलूजा ने सरोपा व गिफ्ट भेंट कर सम्मानित किया।
ये रहे मौजूद
गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा, डॉ. सुरेंद्र कौर वालिया, परमजीत सिंह, हरजीत सिंह, गुणवीर सिंह, जगजीत सिंह, चरण जीत सिंह आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है बैसाखी: कमलेश चौधरी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। एसडीपीएस इंटरनेशनल स्कूल में शनिवार को बैसाखी पर्व धूमधाम से मनाया गया। संस्थापक कमलेश चौधरी ने कहा कि बैसाखी फसल, नई शुरुआत और सिख समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है। प्रधानाचार्य अरविंद सिंह जादौन ने कहा कि इस महीने में रबी की फसल पककर पूरी तरह तैयार हो जाती है और उनकी कटाई भी शुरू हो जाती है। इसीलिए बैसाखी को फसल पकने और सिख धर्म की स्थापना के रूप में मनाया जाता है। इस दिन से सिखों के नए साल की शुरुआत होती है।
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