शृंगार में इको फ्रेंडली सामग्री का किया जा रहा प्रयोग
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तीन अक्तूबर से नवरात्र पर्व का शुभारंभ हो रहा है। करीब एक माह पहले से बंगाल से आए कारीगरों ने प्रतिमाएं बनाने के लिए यहां डेरा डाल रखा था। अब कारीगर इसे अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। कोलकाता से आए कारीगर यहां की मिट्टी से माता की सजीव प्रतीत होने वाली प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं। इस बार मूर्तिकारों ने 1200 से लेकर 20 हजार तक चढ़ोत्तरी की प्रतिमा तैयार की हैं। शहर में तीन जगहों पर प्रतिमाओं का निर्माण होता है।
नवरात्र पर जगह-जगह माता के दरबार सजाए जाते हैं। नौ दिनों तक माता रानी के दरबार में जगराता आदि का आयोजन किया जाता है। इन देवी पंडालों को सुशोभित करने के लिए प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हुए हैं। जनपद में तीन जगहों पर स्टेशन रोड, मवेशी बाजार व इलाइट चौराहे पास प्रतिमाओं का निर्माण हो रहा है। कोलकाता के कारीगर इसे अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। रंगने के लिए इको फ्रेंडली रंगाें का उपयोग हो रहा है, जो पानी में घुलने के बाद नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। साथ ही माता के मुकुट व आभूषण विशेष प्रकार के कागजों से तैयार किए जा रहे हैं। जो विसर्जन के समय पानी में आसानी से घुलकर नष्ट हो सकें।
जनपद में 522 स्थलों पर लगाए जाएंगे देवी पंडाल
थाना क्षेत्र - पंडाल की संख्या
कोतवाली सदर- 105
जाखलौन - 29
जखौरा - 42
पाली - 21
नाराहट - 37
बालावेहट - 24
महरौनी - 52
बानपुर - 48
सौजना - 15
मड़ावरा - 28
मदनपुर - 14
गिरार - 07
तालबेहट - 51
बार - 33
पूराकलां - 16
योग - 522
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प्रतिमा निर्माण के लिए ऐसे रंगों व सामग्री का प्रयोग किया जाता है, जिससे किसी प्रकार का पर्यावरण को नुकसान न हो। साथ ही आभूषण व अन्य शृंगार सामग्री सभी कलकत्ता से लाई जाती है। जनपद से मिट्टी, बांस व चारा लिया जाता है।-अमित पाल, कारीगर।