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Lalitpur News: समय पर नहीं मिल रही एंबुलेंस...भटक रहे मरीज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। वह कैसी सुविधा, जो लोगों के काम न आए। एंबुलेंस सेवा की भी यही स्थिति है, जो कॉल करने के आधे घंटे बाद भी मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही है। आपात स्थिति में अस्पताल जाने के लिए लोगों को निजी वाहन या निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है। कई बार तो समय से वाहन न मिलने पर कई मरीजों की हालत बिगड़ जाती है। यहां ऐसे कई मामले सामने आए हैं।
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केस एक
जिला महिला अस्पताल में नहीं मिली एबुंलेंस, तड़पती रही महिला
एक फरवरी की रात्रि लगभग नौ बजे ब्लॉक जखौरा के बंदपुरा की नेहा सिंह को रक्तस्राव होने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद रेफर कर दिया। चिकित्सक ने मरीज के मोबाइल से एंबुलेंस की मांग की, लेकिन वह 45 मिनट तक नहीं आई। महिला दर्द से तड़पती रही। उसका पति ढाई वर्ष के पुत्र को लेकर भटकता रहा। बाद में किसी रिश्तेदार से पैसों की व्यवस्था कर निजी एंबुलेंस लेकर झांसी पहुंचा।
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केस दो-
दो फरवरी को शहर के समीप ग्राम रजवारा निवासी रवि के परिवार की महिला को प्रसव बाद डिस्चार्ज होने पर घर जाना था। जच्चा व बच्चा को घर ले जाने के लिए अस्पताल परिसर में बैठे एंबुलेंस कर्मियों से कहा, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिल पाई। इस पर टैक्सी करके जच्चा व बच्चा को घर ले जाना पड़ा। ऐसे में अस्पताल में मरीजों को होने वाली समस्याओं का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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केस तीन-
28 जनवरी को रघुवीर सिंह राजकीय महाविद्यालय में मोहल्ला रामनगर निवासी रमेशचंद्र के ऊपर हाईटेंशन तार टूटकर गिरने से वह झुलस कर बेहोश हो गया था। लोगों ने 108 पर कॉल कर एंबुलेंस की मांग की, लेकिन उन्हें आधे घंटे से ज्यादा देर तक इंतजार करना पड़ा। बाद में एंबुलेंस पहुंची और अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने समय से एंबुलेंस न मिलने का आरोप लगाया था।
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केस चार
अगस्त वर्ष 2022 में मोहल्ला घुसयाना निवासी हरीराम की तबीयत अधिक खराब हो गई थी। अस्पताल ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस को कॉल किया, लेकिन एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। इस पर परिजन वृद्ध हरीराम को हाथ ठेला पर लिटाकर अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया था। परिजनों ने समय से एंबुलेंस न मिलने से मौत होने का आरोप लगाया था।
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ये है एंबुलेंस की स्थिति
एंबुलेंस - संख्या
108 - 06
102 - 05
एएलएस - 03
कुल - 14
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काॅल करने के 15 मिनट में पहुंचने का है नियम
मरीज या तीमारदार द्वारा एंबुलेंस के लिए 108 पर कॉल किया जाता है। इसके बाद 15 मिनट में एंबुलेंस पहुंचनी चाहिए। वहीं अस्पताल से रेफर होने पर एएलएस एंबुलेंस को चिकित्सक कॉल करते हैं, लेकिन रेफर होने पर चिकित्सक ध्यान नहीं देते। ऐसे में मरीज एंबुलेंस के लिए भटकते रहते हैं।
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जिला महिला अस्पताल में प्रसव के बाद परिवार की महिला को घर ले जाना था। सूचना के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली। टैक्सी लेकर घर जाना पड़ रहा है।
- रवि

एक फरवरी को भाई की पत्नी को रक्तस्राव होने पर जिला महिला अस्पताल लाया, यहां से रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस का इंतजार किया, न मिलने पर निजी एंबुलेंस से झांसी जाना पड़ा।
- कप्तान सिंह
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कॉल करने के बाद 15 मिनट में एंबुलेंस पहुंचने का प्रावधान है। पास की एंबुलेंस को भेजा जाता है। मरीज को एंबुलेंस न मिलने की सूचना मिली है, इसकी जांच कराई जाएगी।-सुमित पाल, डिस्ट्रिक्ट कॉर्डिनेटर, 102, 108 एंबुलेंस
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अस्पताल से रेफर होने की स्थिति में परिसर में मोबाइल नंबर दर्ज है, जिस पर चिकित्सक ही सूचना दे देते हैं। इस पर एंबुलेंस मिल जाती है।-संजय सिंह, प्रभारी एएलएस
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मरीजों को एंबुलेंस समय से न मिलने की जानकारी हुई है। इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में गलती पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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