संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जनपदों में शुमार ललितपुर में शराब के शौकीनों की बड़ी तादाद है। यहां के लोग प्रतिदिन करीब 80 लाख रुपये शराब पीने पर खर्च कर रहे हैं, जबकि अप्रैल 2023 से अभी तक करीब 300 करोड़ रुपये की शराब पी चुके हैं।
ललितपुर, बुंदेलखंड के सबसे पिछड़े जिलों में गिना जाता है। यहां के ज्यादातर लोग मजदूरी और खेती किसानी करते हैं। कोई बड़ा उद्योग या कारखाना न होने से बेरोजगारी बड़ी समस्या है। लेकिन, शराब की खपत लगातार बढ़ रही है। यहां देसी, अंग्रेजी, बियर और मॉडल शॉप की सरकारी ठेका की 164 लाइसेंसी दुकानें हैं। इन पर बिकने वाली शराब से सरकार को करोड़ों का राजस्व मिलता है। सरकार द्वारा आबकारी विभाग को प्रतिवर्ष राजस्व हासिल करने का लक्ष्य दिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए सरकार ने 396 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया था। अप्रैल 2023 से अब तक करीब 300 करोड़ रुपये की शराब बिक्री हो चुकी है। इस हिसाब से हर महीने करीब 25 करोड़ रुपये की और प्रतिदिन 80 लाख की शराब बिक रही है। शराब के शौकीनों की बढ़ती तादाद के चलते यहां नशे में मारपीट की घटनाएं हो रही हैं।
ठेका शराब की दुकान की स्थिति
देसी - अंग्रेजी - बियर - मॉडल शॉप - योग
90 - 39 - 30 - 05 - 164
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होली के दिन ही 2.50 करोड़ की शराब पी डाली
होली पर शराब की दुकानों पर करीब ढाई करोड़ की बिक्री हुई। होली के दिन 25 मार्च को शाम पांच बजे तक दुकानें बंद रहीं, इस कारण लोगों ने 24 मार्च को ही शराब खरीद ली थी। 25 मार्च की शाम पांच बजे के बाद दुकानें खुलने पर लोगों ने पीने के लिए शराब खरीदी।
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जनपद में शराब की कुल 164 सरकारी दुकानें हैं। इस वित्तीय वर्ष में शराब का 396 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित है। अब तक करीब 300 करोड़ का राजस्व हासिल किया जा चुका है।
विजय सिद्धांत, जिला आबकारी अधिकारी