मड़ावरा। इसे प्रशासनिक लापरवाही कहें या विभागीय मिलीभगत कि मड़ावरा क्षेत्र में अवैध खनन का काला कारोबार रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। वैसे तो चेकिंग के नाम पर तहसील के सबसे आला-अधिकारी का वाहन देर रात सड़कों पर घूमता नजर आता है, लेकिन दिन के उजाले में बेधड़क अवैध खनन जैसे होने वाले काले कारनामों पर लगाम ही नहीं लग पा रही है। इसके पीछे क्या वास्तविकता है कि ऐसे मामले साहब को नजर ही नहीं आते या उनकी नजर वहां जाने ही नहीं दी जाती। गौरतलब है कि तहसील क्षेत्र की तिसगना पौधशाला के नजदीक रोहिणी नदी के तेन्दुघाट पर पीडब्ल्यूडी द्वारा नया पुल बनवाया गया है। पुल निर्माण के बाद पुल के दोनों ओर सड़क के ऊंचे उठे बंध के किनारे ग्रेनाइट खण्डों से पिचिंग निर्माण कार्य भी कराया जाना प्रस्तावित है। उक्त निर्माण कार्य के ठेकेदार द्वारा नियम विरुद्ध पुराने पुल को तोड़कर अवैध खनन किया गया। पुल तोड़कर कराये गए अवैध खनन संबंधी समाचार प्रकाशन के बाद अवैध खनन का कार्य तो बंद करा दिया गया, लेकिन लगभग आधे पुल से खण्डे निकाल लिए गए और अपनी कारगुजारी को छिपाने के लिए उस जगह को मिट्टी से ढक दिया गया। बता दें कि मड़ावरा-गिरार सड़क मार्ग के तेन्दुघाट पर जो पुराना पुल है वह बिलकुल ठीकठाक था, लेकिन पुल की ऊंचाई कम होने से वर्षाकाल में नदी का पानी पुल पर आ जाने के चलते आवागमन बाधित हो जाता था। ठेकेदार द्वारा ठीकठाक पुराने पुल को तोड़कर अवैध खनन कर खण्डा समेत मोरम का भी खनन कराया गया। ग्रामीणों की मांग है कि तेन्दुघाट के पुराने पुल पर अवैध खनन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करते हुए पुल को पूर्व की भांति यथावत कराया जाए।