ललितपुर। देवगढ़ वन क्षेत्र की पहाड़ियों पर स्थित गुफाओं में रहने वाले गिद्धों के लिए खोले गए रेस्टोरेंट ने उनकी मौतों पर अंकुश लगा दिया है। रेस्टोरेंट में
चिकित्सकीय जांच के बाद परोसे जाने वाले मांस के कारण गिद्ध अपनी आयु पूरी कर रहे हैं।
उनकी संख्या भी बढ़ने लगी है । एक समय वहां 60 से 70 ही गिद्ध थे जो अब बढ़कर 125 हो गए हैं। इनमें किंग प्रजाति के गिद्ध भी हैं जिन्हें जटायु कहा जाता है। संख्या बढ़ने से वाइल्ड लाइफ के अफसर भी उत्साहित हैं।
जनपद में गिद्धों की संख्या लगातार कम होती देख देवगढ़ में बेतवा किनारे 1977 में महावीर स्वामी वन्य जीव विहार बनाया गया। 1998 तक यह क्षेत्र वन विभाग के अधीन था। इसका कोई असर नहीं दिखा। गिद्धों की मौत लगातार होती रही। इस पर 1998 में यह वन्य जीव विहार तैमूर, मिर्जापुर के सुपुर्द कर दिया गया। उस समय यहां पर गिद्धों की संख्या 60 से 70 थी। गिद्धों की संख्या कम होने व मृत्युदर बढ़ने पर शोध किया गया। पाया गया कि ऐसे बीमार पशुओं के मांस खाने से गिद्धों की मौत हो रही है, जिन्हें बीमारी के समय पेन किलर के रूप में डिक्लोफेनिक दवा दी गई थी। गिद्धों की मौत का कारण पता लगने के बाद शासन स्तर पर इसकी रोकथाम की योजना बनाई गई। तय किया गया कि
गिद्धों का कुनबा बढ़ाने के लिए उनके भोजन पर निगरानी जरूरी है। इसके बाद यहां गिद्धों के लिए रेस्टोरेंट खोला गया। यहां गिद्धों को खाने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण के बाद मांस दिया जाने लगा।
खास तौर से प्रजनन के दौरान मादा गिद्धों पर विशेष निगरानी रखी जाने लगी। उनके भोजन का विशेष परीक्षण किया गया। इसका खासा असर रहा। गिद्धों की अकाल मौत पर अंकुश लग गया। वर्तमान में यहां पर गिद्धों की संख्या 125 तक पहुंच गई।
जनपद में पाई जाती हैं तीन प्रजाति
देवगढ़ में विंध्यांचल की पहाड़ियों पर बेतवा नदी के किनारे गिद्धों की कॉलोनी बनी हुई है। यहां पर करीब 125 गिद्ध हैं। यहां तीन प्रमुख प्रजातियां हैं। गिद्धों की दुर्लभ प्रजाति किंग वाइल्ड भी यहां है। इन्हें जटायु का वंशज कहा जाता है। इस प्रजाति के आठ से दस गिद्ध यहां पर मौजूद हैं। यह संरक्षित प्रजाति है। इनकी संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहे हैं। गिद्धों की यह प्रजाति बुंदेलखंड में चित्रकूट के बाद जनपद में ही पाई जाती है। दूसरी प्रजाति लांग वाइल्ड है। यह लंबी गर्दन के गिद्ध होते हैं। इनकी संख्या 40 के करीब है। सबसे ज्यादा सफेदा गिद्ध पाया जाता है, जिसकी संख्या यहां पर 70 से 80 है।
गोरखपुर वन्य जीव बिहार ने मांगे थे जनपद के जटायु
गोरखपुर वन्य जीव विहार ने जनपद से जटायु (किंग वाइल्ड) को मांगा था। इसके लिए करीब छह माह पूर्व यहां पर गोरखपुर की टीम ने डेरा भी डाला था। लेकिन वह इन्हें पकड़ने में नाकाम रहे। इसके बाद चित्रकूट से गिद्धों को भेजा गया था।
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जांच के बाद मांस दिए जाने से गिद्धों की मौत पर अंकुश लगा है। इनके संरक्षण व आबादी बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। यहां गिद्धों की दुर्लभ प्रजाति भी है। वर्तमान में यहां करीब 125 गिद्ध हैं।
आरएस यादव, रेंजर वाइल्ड लाइफ।