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बाली का बध कर सु्ग्रीव को सौंपा राज, हनुमानजी ने किया लंका दहन

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ललितपुर। श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में तालाबपुरा स्थित श्रीनृसिंह रामलीला मैदान में रामलीला के नौवें दिवस में बाली वध व सीता की खोज एवं लंका दहन की लीला का मंचन किया गया।
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लीला के मंचन में सुग्रीव बाली के पास जाता है और युद्ध के लिए चुनौती देता है। बाली सुग्रीव की पिटाई कर देते हैं। सुग्रीव वहां से प्राण बचाकर भाग जाता है और प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचता है और कहता है कि प्रभु तुमने तो बाली को मारने का वचन दिया था, लेकिन आप तो वृक्ष के पीछे छुपकर तमाशा देखते रहे हो। इसके बाद श्रीराम ने सुग्रीव को एक फूलों की माला पहनाई और फिर सुग्रीव और बाली का युद्ध होता है। इस बार वृक्ष के पीछे से छुपकर श्रीराम वाली को तीर मार देते है और वाली की मृत्यु हो जाती है।
इधर, सुग्रीव सीता की खोज के लिए वानर सेना भेजते हैं एवं समुद्र को पार करना आसान नहीं था, इसलिए जामवंत, हनुमान को उनकी शक्तियां याद दिलाते हैं और हनुमानजी वायु की गति से समुद्र को पार करके लंका पहुंचते हैं। लंका में पहुंचकर सर्वप्रथम वहां पर लंकिनी का वध कर देते हैं और विभीषण से मिलते हैं। माता जानकी का पता पूछते विभीषण ने हनुमान को माता सीता का पता बताते हैं कि माता सीता अशोक वाटिका में अशोक के वृक्ष के नीचे बैठी हैं। हनुमानजी वहां पहुंच कर माता सीता से मिलते हैं और प्रभु श्री राम की निशानी अंगूठी को दिखाती है और खुद को श्रीराम का भक्त हनुमान बताते हैं। हनुमानजी को भूख लगने पर वह अशोक वाटिका पहुंचकर फल तोड़ते हैं और उन्होंने अशोक वाटिका उजाड़ दी। तब रावण अपने पुत्र अक्षय कुमार को भेजता है, लेकिन हनुमानजी अक्षय कुमार का वध कर देते हैं। इसके बाद रावण अपने पुत्र मेघनाथ को भेजता है और मेघनाथ ब्रह्मास्त्र के जरिए हनुमानजी को बंदी बना लेता है और रावण के दरबार में ले जाता है। यहां रावण हनुमानजी की पूंछ में आग लगवा देता है, जिस पर हनुमानजी ने सारी लंका को जलाकर राख कर देते हैं।
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इस मौके पर मुख्य संरक्षक भगवत नारायण अग्रवाल, अध्यक्ष नरेंद्र कड़ंकी, कोषाध्यक्ष अखिलेश पाठक, महामंत्री प्रभाकर शर्मा, उप संरक्षक पवन कुमार जयसवाल, सुनील शर्मा, संरक्षक मंडल गीता देवी यादव पार्षद, शिवानी पाठक पार्षद, पप्पू राजा रोड़ा, रमेश यादव, सरदार हरजीत सिंह, राजू सिंधी, मुख्य निर्देशक पंडित जगदीश सुड़ेले, निर्देशक पंडित जगदीश पाठक, पंडित कृष्णकांत तिवारी, कृष्ण बिहारी मिश्रा, आसाराम सेन, देवी कुशवाहा, मर्दन सिंह यादव, आशीष तिवारी, मनीष पाठक, दीपक गिरी आदि उपस्थित रहे।
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