लॉकडाउन के कारण विभिन्न महानगरों से लौट रहे प्रवासी मजदूरों ने अब गांव के बाहर जाकर मजदूरी करने से तौबा कर ली है। लॉकडाउन में सब कुछ गंवा चुके लोगों का बुरा हाल है। वह घर पहुंचने की जल्दी में हैं, लेकिन संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने निर्णय कर लिया है कि अब गांव में ही मजदूरी करेंगे, लेकिन बाहर काम के लिए नहीं जाएंगे। विभिन्न महानगरों से लौट रहे अधिकांश प्रवासियों का यही कहना है कि उन्होंने जो कुछ कमाया था, लॉकडाउन में सब खत्म हो गया। मकान मालिक ने जबरन मकान खाली करा लिया। ठेकेदार ने बकाया मजदूरी का पैसा नहीं दिया। किसी तरह मजबूरी में काम छोड़कर आए हैं। जो अनुभव मिले हैं, उसके आधार पर अब दोबारा काम करने बाहर नहीं जाएंगे। गांव में ही काम करेंगे, भले ही कम पैसा मिले।