इन दिनों बहुत गर्मी पड़ रही है। तापमान 42 डिग्री से अधिक है, धूप में एक मिनट भी खड़ा हो पाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन इसके बाद भी प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला बंद नहीं हो रहा है। रास्ते में पानी की समस्या है, इस कारण प्यास से व्याकुल प्रवासी मजदूरों के छोटे- छोटे बच्चे बेहाल हैं। बच्चों को पानी मिल गया तो ठीक नहीं तो प्यासे ही रह रहे हैं। स्वयंसेवी संगठन और प्रशासन द्वारा पानी की टंकिंया आश्रयस्थलों पर भिजवाई जा रही हैं, लेकिन गर्मी के कारण थोड़ी ही देर में पानी गरम हो जा रहा है। इस कारण प्रवासियों को गर्म पानी से प्यास बुझानी पड़ रही है।