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नबंवर के अंत तक गेंहूं की फसल की मात्र 51 फीसदी बुबाई

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नवंबर के अंत तक गेहूं की फसल की मात्र 51 फीसदी बुवाई
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ललितपुर।
जनपद में गेहूं की बुवाई वाला 49 फीसदी रकवा किसान खाली छोड़ने के लिए मजबूर है। मानसून सीजन में सामान्य से काफी कम बारिश होने के वजह से यह स्थिति उत्पन्न हो गई है। कृृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बार जनपद में गेहूं की फसल की बुवाई जिले में मात्र 51 फीसदी ही हो सकी है। हालांकि चना, मटर और मसूर की जनपद में लक्ष्य के सापेक्ष 96 से 99 प्रतिशत तक बुवाई हुई है। जनपद के महरौनी व मड़ावरा ब्लॉक में जमीन में नमी काफी कम होने के कारण किसानों के लिए बुवाई करना मुश्किल हो गया है। वहीं, बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई साधन पर्याप्त नहीं होने के कारण भी किसानों को फसल नष्ट होने के अंदेशा के चलते बुवाई नहीं की जा सकी है। कृषि विभाग को इस बार रबी की फसल के लिए विभिन्न खाद्यान्न और दलहनों की बुवाई का लक्ष्य दिया गया था। इसके तहत जिले में गेहूं की फसल के लिए 1,62, 993 हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन नवंबर माह के अंत तक 84 हजार 374 हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है, जो कुल लक्ष्य की 51.76 प्रतिशत बुवाई हो सकी है, जबकि जौ की खेती 9 हजार 616 हेक्टेयर के सापेेक्ष 7 हजार 219 हेक्टेयर जमीन पर ही खेती हो सकी है। इसी प्रकार दलहनों में चना की फसल की बुवाई 20 हजार 780 हेक्टेयर के सापेक्ष 20 हजार 615 हेक्टेयर, मटर की बुर्बाइ 74 हजार 165 हेक्टेयर के सापेक्ष 71 हजार 348 हेक्टेयर व मसूर की फसल की बुवाई 23 हजार 681 के सापेक्ष 23 हजार 562 हेक्टेयर जमीन में बुवाई हो गई है। वहीं जिले में राई/सरसों की फसल की बुवाई 8 हजार 358 हेक्टेयर के सापेक्ष 8 हजार 178 हेक्टेयर अलसी की बुुबाई 16 हेेक्टेयर और तोरिया की बुवाई 173 हेेक्टेयर के सापेक्ष 115 हेक्टेयर हुई है, जो गेहूं व जौ की बुवाई के सापेक्ष लगभग लक्ष्य के अनुसार ही हुई है। इस प्रकार जिले में गेहूं व जौ खाद्यान्न की बुवाई मात्र 53 प्रतिशत, चना, मटर और मसूर दलहनों की बुवाई 97.30 प्रतिशत और सरसों, अलसी व तोरिया तिलहनों की बुवाई कुल 97.42 फीसदी हुई है। यह फसल की बुवाई का आंकड़ा कृषि विभाग द्वारा माह नवंबर के अंत तक का शासन को भेजा गया है।
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