जिले में गरीब परिवारों को गुजर- बसर करने के लिए समाजवादी पेंशन प्रदान की जा रही है। बीते दिनों शासन ने ऐसे परिवारों के बच्चों की शिक्षा की हकीकत जानने के उद्देश्य से शिक्षकों व आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से सर्वे कराया। वर्तमान में एकीकृत सामाजिक पेंशन योजनाएं की साइट पर चिह्नित बच्चों के नामों की आनलाइन फीडिंग कराई जा रही है, इसमें तकनीकी खामी उभरकर सामने आ गई है। साफ्टवेयर में राजकीय, परिषदीय विद्यालयों के साथ कुल बीस विद्यालयों के नाम ही शामिल हो पाए हैं, जबकि जिले के करीब 429 निजी एवं मान्यता प्राप्त विद्यालय के नाम नदारद हैं, इस कारण ऐसे विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के नामों की फीडिंग नहीं हो पा रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए बीएसए ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को पत्र लिखा है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इन हालातों में शासन की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है।