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कच्चे धागे में बंधा भाई बहन का प्यार...

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कच्चे धागे में बंधा भाई बहन का प्यार...
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ललितपुर। कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी उर्दू अदबी संगम द्वारा भाई बहन के रिश्तों का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें अध्यक्ष रामकिशन कुशवाहा ने कहा कि सावन के महीने में आता राखी का त्योहार, कच्चे धागों में बंधा भाई बहन का प्यार। जिस जहां से आए थे वो लौटकर उधर गए, वो तो इक मुसाफिर थे वापस अपने घर गए। सोनिया प्रभाकरन शबनम ने कहा कि दिल याद करके आज तुम्हें ऐसे रो दिया, जैसे किसी किताब ने गजल को खो दिया। रामस्वरूप नामदेव ने अनुरागी ने कहा कि डाली से फूल टूटकर जब जुदा होने लगा, गुलशन यह देखकर दोस्तों रोने लगा। श्यामलाल ने गीत पेश करते हुए कहा कि पिता जिंदगी है प्रगति के स्वर हैं, पिता साश्वत परमपिता परमेश्वर है। प्रशांत श्रीवास्तव ने गजल पेश करते हुए कहा कि तुमने अपना कहा तो गुरुर आ गया, तुमने आंखों में झांका तो सरूर आ गया। हास्य कवि काका ललितपुरी ने कहा कि न जाने किस घड़ी में निकले मेरे पंख, पेट खराब हुआ सुबह से बजने लगा शंख। सुमन लता शर्मा ने गजल पेश करते हुए कहा कि याद जब से तुम्हारी सताने लगी, जिंदगी और भी मुस्कराने लगी। जहीर ललितपुरी ने गीत पेश करते हुए कहा कि मैं नजर आऊंगा तुमकों, सितारों में कही, आसमानों की तरफ नजरें उठा के देखना। इस मौके पर गैंदालाल जैन, किशन सिंह बंजारा, कुसुमलता सोनी, सरवर हिंदुस्तानी, दशरथ पटेल परदेशी, एमएल भटनागर, राजकुमारी, संगीता, जुमनाबाई, त्रिवेणी देवी, कपिल, जितेंद्र पंथ, मनीष कुशवाहा ने भी अपनी प्रस्तुतियां दी।
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