जिले में 1,049 प्राथमिक एवं 492 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, इनमें से 688 विद्यालयों में बेसिक शिक्षा विभाग ने विद्युत संयोजन को स्वीकृति प्रदान की थी। लेकिन, विद्युत विभाग ने शिक्षा विभाग की सूची से इतर विद्यालयों में भी संयोजन कर दिए। इसके बाद से संयोजन की संख्या को लेकर विवाद बना हुआ है। जहां शिक्षा विभाग 688 विद्यालयों में विद्युत संयोजन को सही मान रहा है, वहीं विद्युत विभाग 746 विद्यालयों में विद्युत संयोजन की बात कह रहा है। हाल ही में विद्युुत विभाग ने 744 परिषदीय एवं छह कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों के 03, 48, 46, 444 रुपए के विद्युत बिल विभाग को उपलब्ध कराए हैं। इससे बेसिक शिक्षा विभाग और विद्युत विभाग के अफसर बिल को लेकर आमने- सामने आ गए हैं। बेसिक शिक्षा अफसरों का कहना है कि विद्युत विभाग मनमाने तरीके से बिजली के बिल भेज रहा है। जिन विद्यालयों में संयोजन की स्वीकृति भी नहीं दी गई, उनमें विद्युत विभाग ने संयोजन दे दिए हैं। इसके अलावा कई विद्यालयों के बिल डबल भेजे जा रहे हैं। यही नहीं, कई विद्यालयों के नाम भी स्पष्ट नहीं हैं, ऐसे में विद्युत बिलों का भुगतान मुश्किल है।