मजहब जुदा सही वतन तो इक है यारो
नव वर्ष पर आयोजित किया गया भव्य मुशायरा, कवि सम्मेलन
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। नए साल के मौके पर कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी संगम के बैनर तले एमएम भटनागर के आवास पर एक भव्य कवि सम्मेलन और मुशायरा का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य अजय कुमार जैन ने की। वहीं, इस मौके पर वरिष्ठ कवि शिखरचंद मुफलिस को उनके 87वें जन्मदिवस पर कवियों ने उन्हें 87 गुलाब के फूलों की माला पहनाकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही यहां उनकी साहित्यिक कृति दर्द का अहसास, का विमोचन भी किया गया। कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने देश समाज को मुहब्बत का पैगाम देते हुए कहा कि महजब जुदा सही वतन तो इक है यारो, अपनी धरती और गगन तो इक है यारो, अनेकता में एकता ये है हमारी विशेषता, हर रंग के फूल खिले चमन तो इक है यारो। कवियित्री सुमनलता शर्मा ने कहा कि दोनों के दरम्यां अजब फसला रहा, वो मेरे पास होके भी मुझसे जुदा रहा। गीतकार जगदीश सोनी ललितपुरी ने कहा कि अगर वेवफाई बनाई न होती, किसी से किसी की बुराई न होती। रामस्वरुप नामदेव अनुरागी ने कहा कि दिल में दर्द छुपाने से कुछ नहीं होगा, प्यार में अश्क बहाने से कुछ नहीं होगा। दशरथ पटेल परदेशी ने कहा कि तुम्हारे इश्क में पागल सा फिरता है दीवाना, यूं जब से देखा है तुझको है घायल सा ये दीवाना। युवा शायराना मनीषा सोनी अंजुम ने गजल प्रस्तुुत करते हुए कहा कि दिल दिये की तरह जलता रहता मगर, रोशनी के लिए क्यों तरसते हैं हम। सरवर हिंदोस्तानी ने कहा कि इस गुलशन में फूल है कितने कौन है माली मत देखो, कौन है हैरां कौन परेशान है इंसां ये देखो। रमेश पाठक रविंद्र ने अपनी रचना पेश करते हुए कहा कि एक भोला गांव का गया शहर की छांव में, चलते चलते छाले पड़ गए उसके दोनों पांव में। गीता सोनी सागर ने कहा कि सुख शांति बढ़े, धन धान्य बढ़े हर ओर नई खुशहाली हो, नित नई तरक्की करे वतन में रब से खैर मनाती हूं। किशन सिंह बंजारा ने कहा कि नेता है हम देश के सच्चे झूं का है आधार, स्वार्थ नशे में डूबे रहते सबसे बड़े मक्कार। एमएल भटनागर ने कहा कि कुछ परिंदे उड़ गए है आशयाना छोड़कर, मामा मुफलिस दो परिंदे इक दिन उड़ जाएंगे। शिखर चंद मुफलिस ने कहा कि मुझे न डर है जन्ट कलैक्टर कोतवाल का, कोई क्या कर लेगा मेरा दोस्तो फटेहाल का। कवि सम्मेलन में काका ललितपुरी, सिद्दीकी, अशोक क्रांतिकारी, श्यामलाल श्याम, विजय जैन पाली, बाबूलाल द्विवेदी, शीलचंद शास्त्री, रवि चुनगी, हरगोविंद अहिरवार, गनेश बाबू, शिवनारायण, रामप्रकाश शर्मा, रश्मि, शालिनी, संतोष, अनुराग, लकी, रुबी, हरीश कुुमार, अम्बरीश कुमार, अर्पित, भगवत नारायण शर्मा, अजय बरया, डा.हुकुम चंद पवैया आदि उपस्थित रहे।