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नौ देवियों का दरबार देखने उमड़ा श्रद्घा का सैलाब

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ललितपुर।श्रीसिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की भव्य झांकी का दरबार के दर्शन के लिए भक्तों का मेला लग रहा हैं। मां दुर्गा के दरबार का पूजन व महाआरती चंडीपीठाधीश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज के सानिध्य में व अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह, भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष जेके सिंह, राज्यसभा सासंद प्रतिनिधि राजेश यादव, कैलाश नारायण पुरोहित, पार्षद महेंद्र सिंघई, विजय मिश्रा, धर्मेश द्विवेदी ने की। भक्तों को प्रवचन सुनाते हुए चंडीपीठाधीश्वर स्वामी महाराज ने कहा कि स्वरुप में पहला शैलपुत्री, दुसरा ब्रह्मचारिणी, तीसरा चन्द्रधन्टा चौथा कूष्माण्डा पांचवां स्कन्दमाता छठा कात्यायनी सातवां कालरात्रि आठवां महागौरी और नौवां सिद्धिदात्री हैं और ये सभी नाम सर्वज्ञ महात्मा वेदभगवान के द्वारा ही प्रतिपादित हैं। उन्होंने जो मनुष्य अग्नि में जल रहा हो, रणभूमि में शत्रुओं से घिर गया हो, विषम संकट में फंस गया हो तथा इस प्रकार के अनेक भय से आतुर होकर जो भगवती दुर्गा की शरण में जाता हो, उनका कभी कोई अमंगल नहीं होता है और शोक, दुख और भय की प्रप्ति नहीं होती। मां जगदम्बा को महामाया के भी नाम से जानते हैं। शास्त्रों में वर्णन है कि भगवान विष्णु की योगनिन्द्रारुपा जो भगवती महामाय हैं, उन्हीं से यह जगत् मोहित हो रहा है। वे महामयादेवी ज्ञानियों के भी चित्त को बलपूर्वक खींचकर मोह में डाल देती हैं। वे ही इस संपूर्ण चराचर जगत् की सृष्टि करती हैं और वही प्रसन्न होने पर मनुष्यों को मुक्ति के लिए वरदान देती हैं। महामाया देवी को ही सनातनी देवी तथा संपूर्ण इश्वरों की भी अधीश्वरी हैं। ब्रह्माण्ड को धारण करने वाली माता को ही सृष्टिरूपा, स्थितिरुपा और संहाररुप को धारण करने वाली कहा गया है। नौरुप को धारण करने वाली और दस विद्याओं की ज्ञाता भी कहा गया है। मां जगदंबा को अजन्मा कहा गया है फिर भी इनका प्राकट्य अनेक प्रकार से होता है।
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