दीनहीनों की सहायता करना हनुमानजी का ‘रामकाज’
ललितपुर। श्री दीपचंद्र चौधरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के हिंदी विभाग के कला और साहित्य मंच द्वारा श्री हनुमान जयंती मनाई गई। महाविद्यालय के संस्थापक/प्रबंधक कमलेश चौधरी ने कहा कि दीनहीनों की तुरंत सहायता करना हनुमानजी के लिए ‘रामकाज’ है। अपार-आत्मबल के साथ अपार प्रेम और अपार सेवा की भावना ही हनुमानजी की सच्ची पूजा है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. भगवत नारायण शर्मा ने महात्मा गांधी का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि एक बार उनकी यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के गांव के कुछ युवा अपनी व्यायामशाला में हनुमानजी की प्रतिमा का उद्घाटन कराने आए तो उन्होंने कहा कि हम पवन पुत्र की प्रतिष्ठा क्यों करते हैं। इसलिए कि हमें उन जैसा बल और बुद्धि चाहिए। शरीर और बुद्धिबल तो रावण के पास भी था, लेकिन हम रावण के बदले पवन पुत्र को आदर्श मानकर उनकी पूजा करते हैं। हनुमानजी का शरीर बल, आत्मबल से संपन्न है। प्राचार्य डॉ. जेएस तोमर ने कहा कि पवन पुत्र को भारतीय देव मंडल में प्रमुख स्थान प्रदान किया गया है। इस दौरान सुंदरकांड का पाठ किया गया। रामायणी हरिशंकर रावत, चौधरी नरेंद्र, प्रदीप, प्रवीण, विकास, गौरव, प्रो. अभिषेक रावत, प्रो. कामता प्रसाद प्रो. आदित्य मिश्रा, कामिनी जैन, सुमिता पांडेय, राखी वर्मा, किरन तिवारी, नितिन जैन, यासमीन, मयूरी शर्मा, भागचंद्र, प्रदीप कुमार गंगेले मौजूद रहे।