मरकर भी नहीं मरते, जो शहीद वतन पे हो जाते हैं...
ललितपुर। कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी संगम के बैनर तले एक शम शहीदों के नाम पर कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन किया गया। इस मौके पर यहां संस्था के अध्यक्ष व कवि रामकृष्ण कुशवाहा की तिरंगे की कसम तुमको पुस्तक का विमोचन पुलिस अधीक्षक एमएम बेग द्वारा किया गया। पार्षद राजू यादव द्वारा कार्यक्रम दीप प्रज्ज्वलित किया गया, अध्यक्षता विशिष्ट अतिथि संतोष कुशवाहा एवं काशीराम साहू ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने पंक्तियां पढ़ते हुए कहा कि मरकर भी नहीं मरते जो शहीद वतन पे हो जाते हैं, खुश नसीब वो होते हैं जो इतिहास बनाते हैं। फरिश्ते सजदा करते हैं उन अमर सपूतों को, हंसते हंसते वतन पे जो जां अपनी लुटाते हैं। रामसवरुप नामदेव अनुरागी ने कहा कि वतन के शहीदों ने लहू देके हिंदोस्तां संवारा है, अब आतंकवाद का मुल्क में नहीं होगा पसारा है। इटारसी से आई कवियित्री ममता बाजपेयी ने अपने रचनाएं पेश करते हुए कहा कि जब कोख में बेटी न रहे धरती में पानी, तब खत्म हो समझो यहां जीवन की निशानी। टीकमगढ़ के लिधौरा से आए राजीव राना ने कहा कि गीतों गजलों की महफिल सनम उम्र भर यूं जारी रहेगी, तुमकों गाते रहेंगे सदा हम जब तक दुनिया दारी रहेगी। सुमनलता शर्मा चांदनी ने कहा कि थक गए समर में तो रक्षा का भार मुझे दे दो, मैं रानी झांसी बन जाऊंगी अपनी तलवार मुझे दे दो। हास्य कवि काका ललितपुरी ने कहा कि अंतर तो है झांसी और बांसी में, अंतर तो है काका और काकी में। दशरथ पटेल परदेशी ने कहा कि मेरा सारा जीवन देश पर बलहारी है, मुझे देश की मिट्टी जान से ज्यादा प्यारी है। भोपाल से आए चंद्रभान सिंह चंदर ने कहा कि हमने तो नाग बहुत आस्तीनों में पाले हैं, लिपटे रहते हैं गले में मन के मगर काले हैं। कार्यक्रम में अन्य कवियों व शायरों में फैजान हिन्दोस्तानी, अशोक क्रांतिकारी, किशन सिंह बंजारा, राजाराम खटीक, गेंदालाल सतभैया, एमएल भटनागर, सरवर हिंदोस्तानी, श्यामलाल श्याम, केके पाठक आदि ने अपनी प्रस्तुतियां दी। इस मौके पर रामप्रकाश शर्मा, कन्हैयालाल यादव, हरी यादव, विजय सिंह, पंकज रैकवार, कम्मू कुशवाहा, राजपाल यादव, उमेश सोनी, संतोष सोनी, प्रताप नारायण विश्वकर्मा, दयाचंद, बृजेश श्रीवास्तव, राकेश जैन, छक्कीलाल साहू, राकेश, शिवनारायण वर्मा, धर्मेंद्र खटीक उपस्थित रहे।