संस्थाओं ने मनाई गांधी जयंती
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। भारतीय जनता पार्टी ने गांधी जयंती को स्वच्छता दिवस के रूप में मनाया। इसमें सभी कार्यकर्ताओं ने घंटाघर पर स्थित गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान जिलाध्यक्ष जगदीश सिंह लोधी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सबसे ज्यादा स्वच्छता पर जोर दिया। 1925 में एक अधिवेशन के मौके पर गांधी ने देखा कि अधिवेशन स्थल के चारो ओर गंदगी फैली हुई है। यह देखकर गांधी ने स्वयं ही सफाई की। जिसको देखकर सभी सफाई अभियान में जुट गए। जिसको ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने देश को खुले में मुक्त करने की परिकल्पना की और शौचालयों का निर्माण कराया। इस दौरान श्रम सेवायोजन मंत्री मनोहर लाल पंथ, सहकारी बैंक के सभापति हरीराम निरंजन, निवर्तमान जिलाध्यक्ष रमेश कुमार सिंह, सांसद प्रतिनिधि प्रदीप चौबे, जिला महामंत्री राजकुमार चूना, गवत दयाल सिंधी, देवेंद्र गुरु, रजनी साहू, घनश्याम साहू मौजूद रहे। वहीं, योग साथियों ने कंपनीबाग में 150 वीं जयंती मनाई। इसमें उन्होंने सर्व प्रथम कंपनीबाग में सफाई कर सभी नगरवासियों को सफाई अभियान चलाने में सफाई की। इस दौरान फूलचंद्र रजक, मुहम्मद शरीफ, नातीराजा, राघवेंद्र, सुरेंद्र कुमार जैन मौजूद रहे। वहीं, मां शारदा इंटर कालेज में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पं जवाहर लाल बहादुर शास्त्री की वर्षगांठ मनाई। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राजमंत्री मनोहर लाल पंथ व विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा ने दीप प्रज्वलित कर किया। जिसमें बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दी। वक्ताओं ने ाष्ट्रपिता व शास्त्री के जीवन पर प्रकाश डाला गया। साथ ही शासन द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। पूर्व विधायक ने राष्ट्रपिता व लालबहादुर शास्त्री के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान पार्षद मंजूलता लवली शर्मा, कृष्ण कुमार पंथ, प्रबंधक रविशंकर राठौर, वीरेंद्र सोनी, इसरार खान, नितिन करौसिया, नरेद्र कुमार आदि मौजूद रहे। वहीं संत स्वामी ब्रह्मानंद महाविद्यालय में गांधी जयंती की 150 वीं वर्ष गांठ हर्ष के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंधक ज्योतिसिंह लोधी ने गांधी के चित्र पर मार्ल्यापण कर किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने गांधी के जीवन दर्शन से संबंधित प्रेरक प्रसंग सुनाए। महाविद्यालय के प्रवक्ताओं ने गांधी के स्वच्छता के सिद्घांत को सेवा का मूल मंत्र बताया और महापुरुषों के सिद्घांतों को जीवन में उतारने की सीख दी। इस दौरान राधाचरण राजपूत, प्राचार्य वीपी चौबे, प्रेमनारायण, एसपीसिंह बुंदेला, आरके सिंह, डोली बानो, आदि मौजूद रहे।