राम वन आगमन पर केवट संवाद लीला का मंचन किया
छठवें दिन सीता स्वयंवर, सीता-राम विवाह में महिलाओं ने गाए मंगल गीत
बार। ग्राम बस्तगुवां में रामलीला मंचन के छठवें दिन भगवान श्री राम का विवाह ,रामवनगमन व केवट संवाद की लीला का मंचन किया गया इसमें राम लीला मंचन में भगवान की बारात जनकपुर पहुंचने पर जनकपुर वासियों ने उनका स्वागत किया। जिसमें महिलाओं ने मंगलगीत गाए महाराज जनक ने बारातियों को तिलक लगाया तत्पश्चात भगवान श्री राम को माला पहना कर आरती उतारी व वैदिक रीति से श्री राम-सीता जी का पाणिग्रहण संस्कार आयोजित किया गया। सभी नगरवासी विदाई के समय भावुक हो गए अयोध्या पहुंचने पर श्री राम सीता जी का स्वागत किया गया जिसके बाद भगवान श्री राम को अयोध्या के राजा का अभिषेक की तैयारी जोरों से चल रही थी, किंतु मंथरा के रानी कैकई को बहकाया कि राम के राजतिलक की जगह भरत का राजतिलक कराये, आपके पुत्र भरत का हित राजा बनने से ही संभव है। मंथरा ने रानी कैकई से कहा कि वह दो वरदान महाराज दशरथ से मांग लें मंथरा की बात मानकर रानी कैकई कोपभवन में चली गय , महाराज ने कोपभवन में पहुंचकर रानी को समझाने की कोशिश की, परंतु रानी अपने फैसले पर अटल रही ,आखिर महाराज को दोनों वरदान भरत को राजतिलक व श्री राम को 14 वर्ष का वनवास दिया। महाराज की आज्ञा का पालन करते हुए सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास को निकल पडे़, जिससे अयोध्या नगरवासी दु:खी व्यथित होकर महामंत्री सुमंत्र के रथ को रोकने लगे। भगवान नगरवासियों के आग्रह पर दिन में रुक गये, रात्रि में सो रहे नगरवासियों को छोड़कर श्री राम ने सुमंत्र के रथ पर आरूढ़ होकर वन के लिये प्रस्थान कर गये। गंगा नदी को पार करने पर श्री राम और केवट के मध्य संवाद संपन्न हुआ। भगवान के चरण को धोकर केवट ने गंगा नदी को पार कराया, कथा के व्यास श्री रामेश्वर पटैरिया रहें। इस अवसर पर राम किशोर बबेले ,महेंद्र प्रताप सिंह ,भान सिंह, जय सिंह, सोनेजू ,रामरक्षपाल सिंह, राजेंद्र प्रताप सिंह, राकेश भार्गव, रवि बबेले, नीरज भार्गव, नातीराजा ,सोन सिंह का विशेष सहयोग रहा, संचालन देवनारायण दुबे ने किया।