विवेकानंद के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान
ललितपुर। भगवान आदिनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन महर्रा में युवाओं के प्रेरणा श्रोत, नये विचारों के जनक भारत के महान दार्शनिक नारी शिक्षा के उद्धारक भारतीय शिक्षा दर्शन के अग्रदूत-स्वामी जी विषय पर आयोजित गोष्ठी में उनके विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन प्रबंधक प्रदीप कुमार जैन एवं प्राचार्य डॉ सुनील कुमार जैन द्वारा किया गया। अश्विनी कुमार जैन सहायक अध्यापक ने कहा कि व्यक्ति को अपने बोध को विकसित करना चाहिए, इसी को भगवान बुद्ध ने बौधित्व कहा है। प्रदीप कुमार जैन ने कहा कि असफलता ही व्यक्ति को सफलता की ओर प्रेरित करती है। स्वामी जी का वाक्य उठो जागो और तब तक प्रयास करते रहो जब तक की लक्ष्य प्राप्त नही हो जाता तभी सार्थक होगा। प्राचार्य डॉ सुनील कुमार जैन ने कहा कि शिक्षकों को अपने शिक्षण कार्य में ऐसी शिक्षण तकनीकि एवं युक्ति का प्रयोग करना चाहिए जो विद्यार्थियों में अधिक से अधिक तर्क विचार करने करने की आदतों का संचार करें। शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ शक्तिवान सिंह ने कहा कि चित पर नियंत्रण करके हम अपने विचारों को नयी दिशा दे सकते हैं एवं निराशा को जीवन से दूर कर सकते हैं। अर्पणा जैन ने कहा कि विवेकानंद उस समय देश के पतन के कारणों में से नारी जाति की निरक्षरता को मानते थे। अरविंद कुमार आर्या ने कहा कि हमारे वैदिक सभ्यता और संस्कृति के ज्ञान दर्शन के साथ हमें आज पाश्चात्य ज्ञान की आवश्यकता है, जिसे स्वीकार करने में हमें कोई आपत्ति नहीँ होनी चाहिए। गोष्ठी में निधि जैन विभागाध्यक्ष डीएलएड, भानुप्रताप बाजपेयी, बृजमोहन वर्मा, उमेश तिवारी, रामसेवक चंद्राकर, सुरेंद्र भारतीय, सर्वेश श्रीवास्तव, सुरेंद्र साहू, विनीता जैन, भावना सेन, मधु जैन, अनुज हुण्डैत, वरिष्ठ कंप्यूटर ऑपरेटर कृष्णा ग्वाला, बृजेश गोस्वामी, पुरूषोत्तम सेन देव मलोटिया उपस्थित रहे। संचालन अश्विनी कुमार जैन ने किया।