लखीमपुर खीरी। जिले में दूध की खपत जहां हर रोज बढ़ती जा रही है, वहीं इसका उत्पादन कम होता जा रहा है। दूध की बढ़ती मांग ही मिलावट का कारण बन रही है। इसमें पानी से लेकर अन्य सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री की मिलावट की जा रही है। हालांकि जिले में अब तक दूध के जो भी सैंपल लिए गए हैं उनमें सिर्फ पानी मिलाने की ही पुष्टि हुई है।
जिले में रोजाना करीब 12 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, लेकिन प्रति व्यक्ति निर्धारित मानक के मुताबिक खपत करीब 16 लाख लीटर प्रतिदिन है। ऐसे में चार लाख लीटर दूध की आपूर्ति पानी मिलाकर हो रही है। इसका खुलासा पिछले दिनों खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच रिपोर्ट में हुआ है।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि पिछले सत्र में 464 निरीक्षण कर दूध के 36 नमूने भरे गए। इनमें से 30 नमूने फेल हुए। इसमें फैट यानि वसा और अन्य पोषक तत्व कम मिले। उन्होंने बताया कि जिनके सैंपल फेल हुए हैं उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। इसमें अधिकतम 5 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
इनकी होती है जांच
- दूध में मौजूद तत्वों की मात्रा का निर्धारण मानकों के अनुरूप है या नहीं
- सोडा, यूरिया, कार्बोनेट व साल्ट की उपस्थिति
- दूध में वसा की मात्रा
- दूध की डेंसिटी (घनत्व)
- लैक्टोज (शर्करा) की मात्रा
- दूध में पानी की मात्रा
- अन्य किसी तरह की मिलावट
पानी मिलाने से कम हो जाती है पौष्टिकता
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया ने बताया कि यह अच्छी बात है कि जिले में अब तक जो सैंपल लिए गए हैं उनमें किसी तरह का केमिकल, यूरिया आदि की मिलावट नहीं मिली है। इनकी मिलावट पाचन तंत्र की गड़बड़ी से लेकर फूड पॉयजनिंग तक का कारण बन सकती है। हालांकि दूध में पानी की मिलावट से इसकी पौष्टिकता कम हो जाती है।
ऐसे दूध, घी पर होती है कार्रवाई
- क्रीम (मलाई) जो केवल दूध से न बनी हो और उसमें मिल्क फैट 40 प्रतिशत से कम हो।
- दूध जिसमें जल मिलाया गया हो
- घी जिसमें दूध से निकले घी से भिन्न कोई पदार्थ हो
- मक्खन रहित दूध शुद्ध के नाम से बेचा जाए
- कृत्रिम मिष्टकर युक्त पदार्थ मिला हो
घर पर ऐसे करें मिलावट की जांच
1- पानी की मिलावट - थोड़ा दूध तिरछी सतह पर गिरा दें। शुद्ध दूध धीरे-धीरे आगे बढ़कर एक सफेद निशान छोड़ता है, जबकि पानी मिला दूध तेजी से बिना निशान छोड़े बहता है।
2- दूध में स्टार्च की मिलावट - टिंक्चर आयोडीन की कुछ बूंदें मिलाने पर स्टार्च युक्त दूध में नीला रंग आ जाता है। टिंक्चर आयोडीन दवा दुकानों पर आसानी से मिल जाता है।
3- दूध में यूरिया की मिलावट - दूध में यूरिया की जांच के लिए परखनली में दूध लेकर उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर का पाउडर डालकर मिलाएं और पांच मिनट के लिए रख दें। इसके बाद इसमें एक लाल लिटमस पेपर डुबाने पर इसका रंग लाल से नीला होने का मतलब यूरिया की मिलावट है। लाल लिटमस पेपर स्टेशनरी की दुकानों पर मिल जाता है।
4- दूध में वनस्पति की मिलावट - तीन से पांच एमएल दूध एक परखनली में लेकर उसमें दस बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं एक चम्मच चीनी मिला दें। पांच मिनट बाद लाल रंग दिखने का मतलब वनस्पति की मिलावट है।
दुधारू पशुओं की संख्या
पशु - संख्या-
1. देशी गाय - 166197
2. क्रास बीड गाय - 40643
3. भैंस - 362641-
प्रति व्यक्ति दूध की खपत - 375 मिलीलीटर
जिले की जनसंख्या - करीब 50 लाख
पराग डेयरी खरीद रही 17 हजार लीटर दूध
जिले में पराग डेयरी के बूथ मिल्क सेंटरों की संख्या 54 और पंजीकृत समितियां 256 है। इनसे पराग डेयरी 17 हजार लीटर दूध खरीद रही है। इस दूध की पैकिंग कर जिले के अलावा आसपास के क्षेत्रों दूध और इससे बने अन्य उत्पाद की बिक्री की जाती है।