लखीमपुर खीरी। महिला अस्पताल में इन दिनों ओपीडी महज एक डॉक्टर के भरोसे रह गई है। मरीजों को देखने वाली तीन डॉक्टरों में दो की छुट्टी होने पर ओपीडी से लेकर प्रसव रूम की व्यवस्था लड़खड़ाने लगी हैं। ऐसे में डॉक्टरों को दिखाने के लिए गर्भवती महिलाओं को काफी देर तक अपनी बारी की प्रतीक्षा करनी पड़ी। उधर, लेबर रूप में भी डॉक्टर 12-12 घंटे की ड्यूटी कर प्रसव करवा रहे हैं।
महिला अस्पताल में डॉक्टरों का अभाव है, जबकि ओपीडी से लेकर प्रसव के लिए आने महिलाओं की संख्या में दिन पर दिन इजाफा हो रहा है। डॉक्टरों की कमी के चलते ओपीडी में आने वाले मरीजों को देखने का इन पर जहां दबाव होता है तो वहीं मरीजों को भी अपनी बारी आने के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यहां रोजाना करीब 250 पर्चे बनते हैं, जबकि रोजाना 10 से 15 प्रसव होते हैं। ऐसे में दो डॉक्टरों का अवकाश पर जाना मरीजों के लिए और मुसीबत बन गया है।
महिला अस्पताल में पहले जहां तीन डॉक्टर ओपीडी में बैठते थे, लेकिन अब सिर्फ संविदा डॉक्टर अंजलि वर्मा ही ओपीडी कर रही हैं। डॉ. अंजलि ने बुधवार को 160 और बृहस्पतिवार को 164 मरीज देखे। कुछ ऐसा ही हाल लेबर रूम का भी है। वहां भी डॉक्टर 12-12 घंटे की ड्यूटी कर प्रसव करवा रहे हैं।
तीन डॉक्टरों के सहारे लेबर रूम
ओपीडी के अलावा लेबर रूम में भी डॉक्टरों की संख्या कम है। प्रसव कराने के लिए कम से कम चार डॉक्टरों की जरूरत हैं, लेकिन तीन से ही काम चलाया जा रहा है। ऐसे में हर डॉक्टर 12-12 घंटे की ड्यूटी कर रहा है। सीएमएस का कहना है कि प्रसव कराने से लेकर ओपीडी के लिए आठ स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की जरूरत हैं।
महिला अस्पताल में सीएमएस के अलावा तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ, दो ईएमओ एवं एक संविदा डॉक्टर की तैनाती है। एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के अवकाश पर चले जाने से प्रसव कराने के लिए ईएमओ तैनात की गई हैं। वहीं एक ईएमओ मातृत्व अवकाश पर गई हैं। इससे संविदा डॉक्टर के सहारे ही ओपीडी चल रही है। सीएमएस बोलीं- दो दिन में देखे 137 मरीज
दो डॉक्टर के छुट्टी पर होने से महिला अस्पताल की ओपीडी डॉ. अंजलि वर्मा के सहारे चल रही है। सीएमएस डॉ. ज्योति मेहरोत्रा का कहना है कि मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए वह भी मरीज देख रही हैं। बताया कि बुधवार को 92, बृहस्पतिवार को 56 मरीज देखे।
दिनांक- पर्चे बने- प्रसव हुए
22 मई-348- 24
23 मई-315-16
24 मई-281- 19
25 मई-252- 12
अस्पताल में डॉक्टरों की बेहद कमी है। दो ईएमओ, तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ व एक संविदा डॉक्टर की तैनाती है। एक डॉक्टर पांच जून तक छुट्टी पर हैं तो दूसरी मातृत्व अवकाश पर हैं। इससे ओपीडी में मरीजों को देखने से लेकर प्रसव कराने में दिक्क्त खड़ी हो गई है। हालांकि तीन डॉक्टरों की ड्यूटी लेबर रूम में लगाई गई है, जबकि संविदा डॉक्टर के साथ ओपीडी स्वयं कर रहे हैं।
- डॉ. ज्योति मेहरोत्रा, सीएमएस महिला अस्पताल