लखीमपुर खीरी। झमाझम बारिश से दुधवा टाइगर रिजर्व के कई हिस्सों में जलभराव हो गया है। इससे वन्यजीवों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। घास के मैदानों में पानी भरने से शाकाहारी वन्यजीवों के लिए भोजन का संकट पैदा हो गया है। वन्यजीव ऊंचे स्थानों पर पलायन कर रहे हैं।
बुधवार को हुई जमकर बारिश से जंगल में एक बार फिर हरियाली लौट आई है। वहीं कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। हालांकि अभी बाढ़ जैसे हालात नहीं है। फिर भी अधिक दिनों तक जलजमाव रहने से जंगल के ग्रांउड फलोरा और मुलायम घासों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। भोजन का संकट होने से शाकाहारी वन्यजीव खेतों की ओर रुख कर सकते हैं। हिरन आदि जानवरों के बाहर निकलने से उनके पीछे बाघ और तेंदुआ भी खेतों में जा सकते है। इससे मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की भी आशंका पैदा हो गई है।
बारिश के मौसम में जंगल में जलभराव होने से वनकर्मियों को जंगल गश्त में भी दिक्कतें शुरू हो गई हैं। हालांकि दुधवा टाइगर रिजर्व ने गश्ती टीमों को बरसात, जलभराव और बाढ़ जैसी स्थितियों में चुनौतियों से निबटने के लिए जरूरी संसाधनों से लैस किया है। इसके बावजूद तेज बारिश होने के बाद से गश्त में दिक्कतें आना शुरू हो गई है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है कि वनकर्मी हर स्थिति से निबटने को तैयार हैं।
शिकार और अन्य वन अपराधों का खतरा बढ़ा
बारिश के मौसम में जब जंगल गश्त कमजोर हो जाती है और जंगल में जलभराव होने से भोजन के लिए वन्यजीव जंगल से बाहर निकलने लगते हैं उस समय उनके शिकार का खतरा भी बढ़ जाता है। शिकारी ऐसे ही मौकों की तलाश में रहते हैं। आम तौर पर देखने में आया है कि अधिकांश शिकार की घटनाएं बरसात में ही होती हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व भारत-नेपाल सीमा पर होने के कारण यह जंगल शिकार के लिहाज से और ज्यादा संवेदनशील है। बरसात में चोरी छिपे कीमती पेड़ों को काटने की घटनाएं भी होती रही हैं।
‘जंगल में अभी इतना जलभराव नहीं हुआ है कि वन्यजीव पलायन करें। बाढ़ आने पर ऐसी स्थितियां पैदा होती है। फिलहाल दुधवा टाइगर रिजर्व के वनकर्मी हर स्थिति की चुनौती का सामना करने को तैयार है। शिकार और अन्य वन अपराध रोकने के लिए डीटीआर प्रशासन पूरी तरह एलर्ट है।’
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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