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Lakhimpur Kheri News: आवास, भोजन और पानी मिला तो छूट गया जंगल का मोह

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कैमरे में कैद हुई गन्ने के खेतों में घूम रहे बाघ की तस्वीर    स्रोत : वन विभाग
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लखीमपुर खीरी। केन टाइगर... भले ही यह किसी बाघ का नाम नहीं है, मगर आजकल जिले में इस शब्द की खूब चर्चा है। विभागीय अधिकारी भी बातों-बातों में इसका जिक्र कर जाते हैं। ग्रामीणों की जुबान पर भी अब यह शब्द चढ़ गया है। दरअसल लंबे समय से गन्ने के खेत में डेरा जमाए बाघों को यह नाम दिया गया है।
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मोहम्मदी-महेशपुर रेंज के करीब 40 गांवों में बाघ की दहशत के बाद केन टाइगर ने सुर्खियां बटोरी हैं। 24 दिन में बाघ दो लोगों को मौत के घाट उतार चुका है। हैदराबाद थाना क्षेत्र के गांव इमलिया निवासी अमरेश और मूड़ा अस्सी निवासी जाकिर अली की बाघ के हमले जान गई थी। बाघ को बेहोश कर पकड़ने की अनुमति के बाद से डॉक्टरों की टीम गन्ने के खेतों में बनाए मचान पर डेरा जमाए है। दोनों स्थानों पर कैमरे लगवाए गए हैं। पिंजरे और अन्य इंतजाम भी किए गए, लेकिन बाघ पकड़ में नहीं आया। मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग जागरूकता अभियान पर जोर दे रहा है।


खेतों के आसपास मिला आवास, भोजन तो बना लिया ठिकाना
दो युवकों पर हमले से चर्चा में आया यह बाघ ढाई-तीन साल से गन्ने के खेतों में ही रह रहा है। माना जा रहा है कि इस बाघ का जन्म भी गन्ने के खेत में ही हुआ है। गन्ने के खेतों में ही इन्हें प्राकृतवास मिल गया है। पास में ही पानी की व्यवस्था, पड्डा, छुट्टा जानवर आदि भोजन मिल जाने से इन्हें जंगल का रुख नहीं करना पड़ा। अब बाघ ने गन्ने के खेत को ही अपना ठिकाना बना लिया है। यही वजह है कि प्राकृतवास से जोड़कर आम बोलचाल में इन्हें केन टाइगर बोल जा रहा है। मोहम्मदी-महेशपुर रेंज में जंगल से बाहर रहने वाले बाघों की संख्या सात के करीब होने का अनुमान है।
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बाघ को खेत से रेस्कयू करना चुनौतीपूर्ण
जंगल की अपेक्षा गन्ने के खेतों में बाघ को बेहोश कर पकड़ना काफी चुनौतीपूर्ण है। जंगल में बाघ दूरी तक नजर आता है। खेत में गन्ने की फसल घनी होती है। दो खेतों के बीच में जगह कम होती है, सिर्फ एक मेड़ होती है। फसल को नुकसान न हो, इसलिए अब तक हाथियों की मदद भी नहीं ली गई है। कैमरे से बाघ की लोकेशन का पता किया जा रहा है।


केन टाइगर नहीं, बाघ तो बाघ ही है। यह जरूर है कि बाघ दो-तीन साल से गन्ने के खेत में ही रह रहा है। भोजन, पानी और अच्छा परिवेश मिला तो खेतों में ही घूम रहा है। बाघ को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही सफलता मिलेगी।
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- संजय विश्वाल, डीएफओ दक्षिण खीरी वन प्रभाग
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