लखीमपुर खीरी। दो माह में जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं अचानक से बढ़ी हैं। बाघ के हमले में तीन लोगों की जान चली गई है। तेंदुआ और सियार भी हमलावर हो रहे हैं। हालांकि, वन विभाग इन घटनाओं को सामान्य मान रहा है। व्यवहार में बदलाव जैसी बात तो नहीं, लेकिन बाढ़ के पानी का वजह जरूर माना जा रहा है।
अगस्त और सितंबर में जिले में अलग-अलग स्थानों पर मानव-वन्यजीव संघर्ष की कई घटनाएं हुईं। 27 अगस्त को बाघ ने मोहम्मदी-महेशपुर रेंज में इमलिया गांव निवासी अमरेश कुमार को निवाला बनाया। 11 सितंबर को मूड़ा अस्सी गांव निवासी जाकिर अली पर हमला कर मार डाला। इसके बाद भदैया गांव निवासी युवक पर हमला किया।
जिले के एक छोर में बाघ तो धौरहरा और शारदानगर रेंज में तेंदुए ने हमला कर कई लोगों को घायल किया। तेंदुए के हमले में गंगाबेहड़ा निवासी बालक की जान भी गई। उधर, सियार ने धौरहरा रेंज के टेंगनहा, देवीपुर आदि गांवों में आतंक मचाया। मैगलगंज क्षेत्र के गांव में चाचा-भतीजा और पति-पत्नी को काटकर घायल कर दिया।
इस बार जिले में अगस्त और सितंबर में दो बार बाढ़ गई। बारिश और बैराज से छोड़ा गया पानी कई बार जंगल में घुसा। बाढ़ के पानी ने वन्यजीवों के प्राकृतवास में खलल डाला। सूखी जमीन की तलाश में वन्यजीव जंगल से बाहर आ गए।
दुधवा के फील्ड डायरेक्टर ललित कुमार ने बताया कि मानव-वन्य जीव की घटनाएं सामान्य हैं। व्यवहार में बदलाव जैसी कोई बात तो सामने नहीं आई। हां ये जरूर है कि इस बार बाढ़ के पानी ने प्राकृतवास में खलल डाला है। व्यवहार में बदलाव की यह वजह हो सकती है। संवाद