लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। 45 दिन के अंदर चार बाघ समेत एक तेंदुए की अस्वाभाविक मौत के बाद अब पूरे दुधवा टाइगर रिजर्व में रविवार से सघन सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए पूरे दुधवा में फील्ड स्टाफ के साथ एसटीपीएफ (स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स) के जवानों को भी लगाया गया है। सर्च अभियान के तहत डीटीआर के कर्तनियाघाट में एक बाघ घायल हालत में मिला है, जो लंगड़ाकर चल रहा है।
बाघ का इलाज कराने के लिए पीसीसीएफ से बाघ को बेहोश करने की अनुमति मिल गई है। दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी बी. प्रभाकर ने बताया कि बाघ को रेस्क्यू करने के लिए उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही है। जल्द ही बेहोश कर उसका इलाज शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सर्च अभियान के लिए दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर सेंक्चुरी, बफरजोन और कतर्निया घाट वन्यजीव विहार में कई टीमें लगाई गई हैं।
कहीं कोई वन्यजीव बीमार या घायल दिखता है तो उसकी सूचना तुरंत अपने उच्चाधिकारियों को देंगे। ताकि तत्काल उसके इलाज की व्यवस्था की जा सके। यह सर्च अभियान जंगल की कांबिंग की तरह चलाया जाएगा। सर्च अभियान के दौरान वन कर्मियों के पास आधुनिक उपकरण और मेटल डिटेक्टर भी मौजूद रहेगा। ताकि यह पता लगाया जा सके कि शिकारी ने कोई कुड़का, फंदा, लोहे का तार, खाबड़ आदि तो नहीं लगा रखा है। जंगल में होने वाली अवैध घुसपैठ पर भी नजर रखी जाएगी।
काश.. इसी तरह चलता हमेशा सर्च अभियान
बांकेगंज। बाघों की मौत की जांच करने आई टीम ने भी निगरानी में हुई चूक की बात स्वीकार की है। इसके चलते कुछ लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है तो कुछ अफसरों पर अभी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। अगर पहले भी इसी तरह का अभियान चलाया गया होता तो शायद बाघ को बचाया जा सकता था।
कुकरगढ़ा घटनास्थल के आसपास मिले दूसरे बाघ के पगचिह्न
बांकेगंज। किशनपुर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज के कुकरगढ़ा तालाब में बाघ का शव मिलने के बाद चलाए गए सर्च अभियान में घटनास्थल के आसपास दूसरे बाघ के भी पगचिह्न मिले हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि संभवत: इसी बाघ से संघर्ष हुआ होगा। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत बाघ का संघर्ष किसी बड़े जानवर से होने की बात सामने आई है। फिलहाल मौके पर जीव वैज्ञानिक अपूर्वा को भेजा गया है,जो पूरे क्षेत्र का गहन अध्ययन कर रहे हैं।
घटनास्थल के आसपास लगेंगे बीस कैमरे
बांकेगंज। कुकरगढ़ा तालाब के आसपास दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन 20 कैमरे लगवा रहा है। ताकि इनके जरिए संघर्ष करने वाले दूसरे बाघ की लोकेशन ट्रेस की जा सके। कैमरा लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। इन कैमरों में कैद होने वाली तस्वीरें हर रोज निकाली जाएंगी।
दो बाघों की अभी तक नहीं मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल से सटे रामपुर ढ़कैया में तीन अप्रैल की आधी रात गांव में घुसी बाघिन की सुबह मौत हो हो गई थी। इस बाघिन के शव को पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया था। नौ दिन बीतने के बाद भी बाघिन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट न मिलने से उसकी मौत के सही कारणों का पता नहीं चल सका है। इसके अलावा दो दिन पहले किशनुपर सेंक्चुरी की मैलानी रेंज में एक बाघ का शव तालाब में पड़ा मिला था। इस बाघ के शव को पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया था। इसकी रिपोर्ट भी अभी तक नहीं मिल पाई है।