गोला डिपो की बस में खेल उपकरण व तारों का मकड़जाल- संवाद
लखीमपुर/गोला गोकर्णनाथ। परिवहन निगम के अफसरों की अनदेखी से रोडवेज बसों का बुरा हाल है। सड़कों पर दौड़ने वाली कई रोडवेज बसों में स्टेयरिंग के पास तारों का मकड़जाल फैला है, जिससे हादसे का खतरा बना हुआ है। कुछ दिन पहले गोला डिपो की एक बस में सीतापुर में आग लग गई थी। बावजूद इसके जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे।
लखीमपुर डिपो में 88 अनुबंधित रोडवेज बसें हैं। ये बसें लखनऊ, सीतापुर, गोला, शाहजहांपुर और धौरहरा आदि मार्गों पर दौड़ती हैं। अधिकांश बसों की स्थिति बदहाल है। हालत यह है कि किसी बस में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स नहीं, तो कई बसों के शीशे टूटे हैं। कुछ बसों में स्टेयरिंग के पास तार खुले पड़े हैं। जिससे यात्रियों को हादसे का डर रहता है।
गोला डिपो के पास अनुबंधित बसों के साथ ही निगम की भी बसें है। कई बसों में तारों का मकड़जाल है। गोला डिपो कार्यशाला प्रबंधक राकेश बाबू ने बताया कि डिपो की 10 बसें जो 16 से 17 लाख किलोमीटर चल चुकी हैं, इन बसों की नीलामी प्रक्रिया के लिए प्रस्ताव भेजा जा चुका है। फिलहाल इन बसों को लोकल मार्ग पर चलाया जा रहा है।