चार साल पहले दीवार को लेकर हुई थी जमकर मारपीट
जिस दीवार के गिरने से सिमरन समेत तीन मासूमों की जान गई। उसकी शुरुआत ही विवाद से हुई थी। करीब चार पांच साल पहले इस दीवार को रसीद ने बनवाया था।
बताते हैं कि जिस जगह पर ये दीवार बनी है। वह सार्वजनिक जगह थी। इसके पास कुआं था, जिसके अवशेष अभी भी हैं, लेकिन पत्थर रखकर इसको ढक दिया गया है। आसपास के सभी लोग इस कुएं से पानी भरते थे, लेकिन बाद में रसीद ने जबरन इस पर अपना कब्जा कर लिया। इस जगह को घेरने के लिए इस पर दीवार बना दी। दीवार बनते समय कुछ लोगों ने विरोध किया, जिसको लेकर जमकर मारपीट भी हुई थी। इस मार पीट में घायल एक व्यक्ति की कुछ दिनों बाद मौत भी हो गई थी, लेकिन पुलिस की हीला हवाली के चलते दीवार आनन फानन में बना दी गई थी। यही कारण था कि इस दीवार की नीव गहरी नहीं थी। इतना ही नहीं जब विपक्षियों ने उच्चाधिकारियों से इसकी शिकायत की थी तो दीवार का निर्माण पुलिस ने ही रुकवा दिया था। नाम न छपने की शर्त पर कुछ ग्रामीणों ने बताया कि दीवार में चुनी गईं ईंटों की गिनाई कर पुलिस ने और दीवार न बनवाने की हिदायत दी थी। इस लिए इस पर मिट्टी की दीवार बना दी थी। इस लिए आधी दीवार पक्की थी और आधी कच्ची। झगड़े से बनी दीवार आखिर तीन मासूमों की जान लेकर गिर गई और झगड़े को और भी ताजा कर दिया। घटना के बाद से पीड़ित परिवार वाले चिल्ला चिल्लाकर यही कह रहे थे। अगर यही दीवार मजबूती के साथ बनी होती तो शायद आज तीन मासूमों की जान न गई होती।