लखीमपुर खीरी। रात में ड्यूटी हो या सोशल मीडिया की ललक....वक्त पर नींद से किनारा करना अब लोगों को भारी पड़ने लगा है। अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, थकान से शुरू होते लक्षण कुछ समय बाद हृदय रोग, रक्तचाप और मधुमेह के साथ-साथ मानसिक रोग के रूप में सामने आने लगे हैं। इसके पीछे असल कारण रात में जागने से शरीर में हार्मोन का असंतुलन है।
जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक की ओपीडी में रोजाना डेढ़ सौ से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें 50 प्रतिशत मरीज ऐसे में हैं जो न तो समय पर सोते हैं और न ही आठ घंटे की पूरी नींद लेते हैं। नैदानिक मनोचिकित्सक स्तुति कक्कड़ बताती हैं कि ओपीडी में आने वाले तमाम मरीज तनाव से लेकर अनिद्रा आदि के मरीजों की केस हिस्ट्री में देर रात तक जागने का पता चलता है। इसमें तमाम मरीज ऐसे होते हैं जो ऑनलाइन काम के चलते मजबूरन जागते हैं तो वहीं अधिकतर युवा सोशलमीडिया पर सक्रिय रहकर आधी रात तक जागकर चैटिंग करते हैं।
ऐसे में रात 11 बजे के बाद जागने से शरीर काे सुलाने और जगाने वाले मेलाटोनिन हार्मोंस का स्तर गड़बड़ा जाता है, जिससे तमाम बीमारियां शरीर में घर करने लगती हैं। इसलिए रात 10 बजे तक सोना और रोजाना आठ घंटे की पूरी नींद लेना शरीर के लिए अत्यंत जरूरी है।