एसडीएम और रेंजर के आश्वासन पर पोस्टमार्टम के लिए दिया शव
तिकुनिया। मंझरा पूरब गांव में बाघ के हमले में किसान रमेश भार्गव की मौत के बाद ग्रामीण भड़क गए। उन्होंने मृतक आश्रित को सरकारी नौकरी सहित अन्य सुविधाएं दिलाए जाने की मांग को लेकर हंगामा किया। एसडीएम राजेश कुमार ने जब सभी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया तब जाकर परिजन ने ग्रामीणों की सहमति से शव पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को सौंपा।
सोमवार की शाम बाघ ने ग्राम मंझरा पूरब निवासी रमेश भार्गव पर हमला कर उन्हें मार डाला था। हमले के वक्त रमेश अपने खेत में पशुओं के लिए चारा काट रहे थे। रात में किसान का शव बरामद होने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा। गुस्साए ग्रामीणों ने रात में तय कर लिया था कि मृतक आश्रित को सरकारी नौकरी और अन्य सुविधाएं मिलने का आश्वासन मिलने के बाद ही शव पोस्टमार्टम के लिए जाने देंगे। इस बीच एसडीएम राजेश कुमार, सीओ सुबोध जायसवाल, तहसीलदार, कर्तनियाघाट के रेंजर रामकुमार, उत्तर निघासन बेलरायां के रेंजर बलवंत बहादुर सिंह, कोतवाल तिकुनिया राजू राव मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया।
ग्राम प्रधान रामपाल ने बताया कि परिजन की मांग थी कि मृतक की पत्नी मुन्नी देवी को संविदा पर नौकरी दी जाए और प्रशासन से मिलने वाली अन्य सुविधाएं दी जाएं। जिस पर वन विभाग ने संविदा पर नौकरी देने का आश्वासन दिया। एसडीएम राजेश कुमार ने कहा कि मृतक सहायता के रूप में किसान के परिवार को पांच लाख रुपये, एक एकड़ भूमि का पट्टा और विधवा पेंशन दी जाएगी।
वन विभाग और एसडीएम से आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीण और परिजन सहमत हो गए। करीब 11 बजे मृतक रमेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए पुलिस को सौंप दिया।
कहां गई बाघ की आहट मिलने की सूचना देने वाली मशीन
दो माह पहले वन विभाग ने मझरा पूरब क्षेत्र के ग्रामीणों को बताया था कि वन विभाग खेतों में आबादी के निकट ऐसी मशीनें लगाएगा जो बाघ या किसी अन्य जानवर के आने का संकेत 100 मीटर की दूरी से दे देगी। इस मशीन के जरिए जंगली जानवरों से इंसानों और पालतू पशुओं की सुरक्षा हो सकती थी, लेकिन अब तक यह मशीन नहीं लगाई जा सकी है। इसको लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है।
अगर पकड़ने में देरी हुई तो यह बाघ भी बन सकता है आदमखोर
मंझरा पूरब गांव के प्रधान रामपाल खैरेटिया पंचायत के प्रधान परगट सिंह और क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन बाघ को पकड़ने में देरी करता है तो यह बाघ भी आदमखोर बन सकता है। फिलहाल क्षेत्र में बाघ की आमद से एक बार फिर ग्रामीण दहशत में हैं। वे खेतों में जाने से भी डर रहे हैं।
मृतक रमेश भार्गव के घरवालों को समझाते वनाधिकारी और पुलिस वाले।