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Lakhimpur Kheri: मलबे में दबकर मासूम की मौत के बाद दहशत में ग्रामीण, खुद तोड़े शौचालय

Mon, 13 Mar 2023 01:21 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी

सार

शौचालय गिरने से पांच वर्षीय मासूम की मौत के बाद दहशत में आए ग्रामीणों ने खुद ही अपने शौचालय तोड़ने शुरू कर दिये हैं। गांव में अब भी कई शौचालय जर्जर हालत में हैं। 
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शौचालय गिरने से हुई थी बच्चे की मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर खीरी के मैगलगंज थाना क्षेत्र के गांव चपरतला में शौचालय गिरने से मलबे में दबकर पांच वर्षीय मासूम की मौत के बाद दहशत में आए ग्रामीणों ने खुद ही अपने शौचालय तोड़ने शुरू कर दिये हैं। गांव में अब भी कई शौचालय जर्जर हालत में हैं। रविवार को मामले की जांच के लिए मौके पर पहुंचे डीपीआरओ सौम्यशील सिंह का कहना है कि प्रधान और सचिव को तत्काल सभी जर्जर शौचालयों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए हैं। पीड़ित पिता को 10 हजार की सहायता दी गई है।

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पसगवां ब्लॉक की ग्राम पंचायत चपरतला में शनिवार की दोपहर पांच वर्षीय पंकज पुत्र लालता घर के बाहर जर्जर शौचालय के पास कुछ अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। तभी शौचालय भरभराकर ढह गया। मलबे में दबकर पंकज की मौत हो गई थी। पीड़ित पिता लालता ने वर्ष 2016 में बने शौचालय में घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने से हादसा होने का आरोप लगाते हुए प्रधान, सचिव व पंचायत मित्र के विरुद्ध कोतवाली मैगलगंज में तहरीर दी थी।

ग्रामीण का आरोप है कि पुलिस ने दूसरी तहरीर लिखवाई। जिसमें प्रधान, सचिव और पंचायत मित्र के खिलाफ शिकायत को हटा दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने तीन बार तहरीर बदलवाई। ग्रामीण ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर की है। घटना के दूसरे दिन रविवार को डीपीआरओ सौम्य शील सिंह हादसे की जांच करने गांव पहुंचे और मामले का निरीक्षण कर परिजन को आर्थिक सहयोग भी दिया।

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डीपीआरओ पहुंचे गांव, की जांच

डीपीआरओ ने बताया कि जांच में पाया गया कि वर्ष 2016 में इस शौचालय का निर्माण कराया गया था। वर्तमान प्रधान ही पूर्व में भी प्रधान थे। परिजनों ने जांच अधिकारी के सामने आरोप लगाए कि मुनाफाखोरी के चलते ठेकेदार के माध्यम से इस शौचालय का निर्माण कराया गया था। जबकि सरकार की मंशा के अनुरूप लाभार्थियों के खातों में इसका पैसा भेजा जाना चाहिए था, ताकि लाभार्थी स्वयं इसका अच्छी गुणवत्ता के साथ निर्माण करा सके। इस दौरान एडीओ पंचायत देवेंद्र कुमार, सचिव रजनीकांत पांडेय, विवेक सिन्हा मौजूद रहे।

कई ग्रामीणों ने तोड़े जर्जर शौचालय

शौचालय गिरने से मासूम की मौत होने के बाद से लोग जर्जर शौचालयों को लेकर दहशत में हैं। 1100 की आबादी वाले गांव में कुल 120 शौचालय बने हैं, जिनमें 50 के करीब शौचालय जर्जर हैं। वहीं, जर्जर शौचालय के गिरने से बच्चे की मौत के बाद दहशत में आए पड़ोसी अवधेश, कमलेश, रामस्वरूप, राजेश आदि ने इस घटना से सबक लेते हुए 2016 में उसी ठेकेदार के द्वारा बनाए गए शौचालयों को खुद गिरा दिया, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।

डीपीआरओ सौम्य शील सिंह ने बताया कि यह शौचालय जर्जर अवस्था में था, जिसका उपयोग नहीं किया जा रहा था। जांच में पता चला है कि शौचालय दो दीवारों पर ही खड़ा था। घटना वाले दिन तीन-चार बच्चे कपड़े की छीट बांधकर जर्जर शौचालय की ईंट खींचकर निकाल रहे थे, जिससे यह घटना हो गई।
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