डीपीआरओ पहुंचे गांव, की जांच
डीपीआरओ ने बताया कि जांच में पाया गया कि वर्ष 2016 में इस शौचालय का निर्माण कराया गया था। वर्तमान प्रधान ही पूर्व में भी प्रधान थे। परिजनों ने जांच अधिकारी के सामने आरोप लगाए कि मुनाफाखोरी के चलते ठेकेदार के माध्यम से इस शौचालय का निर्माण कराया गया था। जबकि सरकार की मंशा के अनुरूप लाभार्थियों के खातों में इसका पैसा भेजा जाना चाहिए था, ताकि लाभार्थी स्वयं इसका अच्छी गुणवत्ता के साथ निर्माण करा सके। इस दौरान एडीओ पंचायत देवेंद्र कुमार, सचिव रजनीकांत पांडेय, विवेक सिन्हा मौजूद रहे।
कई ग्रामीणों ने तोड़े जर्जर शौचालय
शौचालय गिरने से मासूम की मौत होने के बाद से लोग जर्जर शौचालयों को लेकर दहशत में हैं। 1100 की आबादी वाले गांव में कुल 120 शौचालय बने हैं, जिनमें 50 के करीब शौचालय जर्जर हैं। वहीं, जर्जर शौचालय के गिरने से बच्चे की मौत के बाद दहशत में आए पड़ोसी अवधेश, कमलेश, रामस्वरूप, राजेश आदि ने इस घटना से सबक लेते हुए 2016 में उसी ठेकेदार के द्वारा बनाए गए शौचालयों को खुद गिरा दिया, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
डीपीआरओ सौम्य शील सिंह ने बताया कि यह शौचालय जर्जर अवस्था में था, जिसका उपयोग नहीं किया जा रहा था। जांच में पता चला है कि शौचालय दो दीवारों पर ही खड़ा था। घटना वाले दिन तीन-चार बच्चे कपड़े की छीट बांधकर जर्जर शौचालय की ईंट खींचकर निकाल रहे थे, जिससे यह घटना हो गई।