पिता हैं होमगार्ड
पीयूष पांडेय ने बताया कि उनके पिता शिवकुमार पांडेय ईसानगर थाने में होमगार्ड के पद पर तैनात हैं। माता गृहिणी हैं। संघर्ष को लेकर उन्होंने कहा कि छोटी जगह से निकले इंसान को जो संघर्ष करना पड़ता है, वह उन्होंने किया है। आर्थिक क्षेत्र में पारिवारिक सपोर्ट की वजह से कोई दिक्कत नहीं आई।
इसलिए सिविल सेवा में जाने का आया ख्याल
पीयूष पांडेय ने बताया कि गांव में अक्सर हम जिन परेशानियों से दो चार होते हैं, उन्हीं सब समस्याओं को देखकर ये ख्याल आया कि सिविल सेवा में जाकर ही हम ग्रामीण क्षेत्रों की हालत सुधार सकते हैं। कहा कि हमारा गांव और क्षेत्र बाढ़ और कटान की जद में रहता है। इससे हम लोगों को बहुत परेशानियां होती थीं। यही सब देखकर सिविल सेवा में जाने का मन बनाया था।
युवाओं को संदेश
उन्होंने कहा कि कभी निराश न हों। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। सोशल मीडिया पर युवाओं की बढ़ती उपस्थिति पर उन्होंने कहा कि आप चाहे कुछ भी करें, किसी भी मंच पर अपनी उपस्थिति दर्शाएं लेकिन पढ़ाई से कोई समझौता नहीं करें। यही सफलता की कुंजी है।
पूर्व छात्र के अफसर बनने से गदगद हुए शिक्षक
खमरिया स्थित चंद्रप्रभा विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पीयूष ने हाईस्कूल और इंटर यहीं से किया है। उन्होंने इंटर में 88.2 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। बताया कि उन्होंने फोन पर पीयूष पांडेय को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उधर, उनके द्वारा इस मुकाम तक पहुंचने पर पीयूष को बधाई देने के लिए क्षेत्रवासी काफी उत्साहित हैं।