लखीमपुर खीरी। थारू क्षेत्र के 26 गांवों में बसही के बाद पचपेड़ा और परबट गांव में एकीकृत जनजाति योजना के तहत ढांचागत योजनाएं लागू की जाएंगी। यहां सड़क, पानी और बिजली के साथ-साथ सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका प्रस्ताव जनजातीय कार्य मंत्रालय को भेजा जाएगा।
जिले में पलिया ब्लॉक के 24 और निघासन ब्लॉक के दो गांवों में जनजातीय आबादी निवास करती है। जनजातीय मंत्रालय इनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार करती है और उसके लिए बजट जारी करती है। चालू वित्तीय वर्ष में बसही गांव को सभी योजनाओं का लाभ दिया गया है। जनजातीय विभाग की तरफ से गांवों को शासन की सभी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और मॉडल गांव बनाने के लिए इस बार पचपेड़ा और परबट गांव का चयन किया गया है। इन दो गांवों को विकास योजनाओं से पू्र्ण रूप से संतृप्त कराने के लिए चयन कर प्रस्ताव तैयार किया गया है।
जनजाति क्षेत्र के ऐसे गांव जो शासन की सभी योजनाओं से लाभान्वित नहीं हो पाते। उनमें हम गांवों का चयन करते हैं। चालू वित्तीय वर्ष में बसही गांव में 130 सौर ऊर्जा की स्ट्रीट लाइटें लगाईं गईं। साथ ही इंटरॉलॉकिंग व अन्य व्यवस्थाएं भी की गईं। प्रस्ताव तैयार कर निदेशक जनजाति विकास को भेजा गया है। उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष में हमको मंजूरी मिल जाएगी। -यूके सिंह, परियोजना अधिकारी
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बलेरा में शुरू होगा थारू हस्तशिल्प केंद्र
परियोजना अधिकारी यूके सिंह ने बताया कि इस वर्ष ग्राम बलेरा में थारू हस्तशिल्प प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की जाएगी। इसमें जनजाति महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र का पुनरुद्धार करके फिर से प्रशिक्षण चालू किया जाएगा।