लखीमपुर खीरी। सात साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या करने के मामले में कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाया। गवाहों की गवाही और साक्ष्यों को मानते हुए एडीजे पूनम सिंह की अदालत ने दोनों हत्यारोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अभियुक्तों पर 40-40 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है।
विशेष लोक अभियोजन संजय सिंह के अनुसार, खीरी कस्बे के एक मोहल्ले के बच्चे 15 मार्च 2017 की शाम खेल रहे थे। इसी दौरान पीलू और तिलका ने सात वर्षीय बच्ची को अपने पास बहाने से बुलाया और उठाकर रामापुर रोड पर स्थित हाजी के आम के बाग में ले गए, वहां आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद बच्ची की निर्मम हत्या कर दी थी। इस प्रकरण में परिजनों ने थाने में हत्या और दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने जांच करते हुए तिलका और पीलू को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कपड़े भी बरामद किए थे। आरोपियों को जेल भेज दिया था। पुलिस ने जांच कर कोर्ट में आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत में निरंजन, रानू, सुनील, डॉ. राजेश कुमार और यामिनी बादल के साथ ही जावेद अख्तर और राजेंद्र पांडे, अवधेश कुमार, नरेंद्र कुमार उपाध्याय, उमेश त्रिपाठी की गवाही कराई और फॉरेंसिक रिपोर्ट भी पेश की गई। मंगलवार को फैसला सुनाते हुए एडीजे पूनम सिंह ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
आखिर सफल हुई मेहनत, कोर्ट में पेश हुए 12 गवाह 19 सबूत
सात साल की बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद हत्या जैसे गंभीर मामले में भी कानूनी दांव पेंच का दौर खूब चला। अदालती सुनवाई के दौरान एक आरोपी की ओर से नाबालिग होने की दलील दी गई, जिसे दस्तावेजों के आधार पर मंजूरी भी मिली, लेकिन अभियुक्त की मानसिकता ने बालिका को इंसाफ दिलाने में अहम भूमिका निभाई, क्योंकि किशोर अपचारी की उम्र 18 वर्ष से कुछ महीने ही कम थी। लिहाजा सब कुछ आरोपी की मानसिक स्थिति को साबित करने पर टिका था। अदालत में अनिल और सुनील ने बालिका को लेकर जाते हुए दोनों आरोपियों को देखा था। कोर्ट में 12 गवाहों की गवाही कराई गई, जबकि 19 सबूत पेश किए गए। पेश किए सबूतों और गवाही के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। तब बच्ची को इंसाफ मिला।