लखीमपुर खीरी। भले ही मंडी में टमाटर के रेट थोक में 60 रुपये से लेकर 80 रुपये हो, लेकिन मुख्य बाजार से लेकर सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जी बेच रहे दुकानदार मनमानी पर उतारू हैं। हाल यह है कि बाहर 160 रुपये से कम टमाटर नहीं बिक रहा है। बताया जाता है कि हर रोज टमाटर के दामों में उतार-चढ़ाव हो रहा है लेकिन एक सप्ताह से रेट 80 रुपये से ज्यादा नहीं पहुंचे हैं।
करीब एक महीने से ज्यादा का समय बीतने को हैं लेकिन फुटकर में टमाटर के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे। बढ़ती कीमतों से घर की गृहिणियों का बजट बिगड़ने लगा है। महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और बेंगलुरू में टमाटर की फसल प्रभावित हो जाने के चलते एकाएक दामों में बढ़ोतरी हुई थी।
मंडी में कम दामों में खरीदने और फुटकर में तीन गुने दाम पर टमाटर बेेचने की पड़ताल की गयी तो हकीकत खुली। बृहस्पतिवार को राजापुर मंडी में थोक का काम करने वाले आढ़तियों से बात की गयी तो एक आढ़ती का कहना था कि आज का भाव 12 सौ से लेकर 14 सौ रुपये कैरेट तक का है, जबकि मंडी में अपनी फसल बेचने आए छोटे किसान 400 से लेकर 500 रुपये में पांच किलो टमाटर बेच रहे थे।
थोक के व्यापारियों ने बताया कि इस समय एक आढ़त से 12 से 15 कुंतल तक ही बिक्री हाे पा रही है, जब दामों में कमी थी तो यही बिक्री बीस कुंतल तक पहुंच जाती थी।
दाम बढ़े तो कम हो गए ग्राहक
बाजार में एकाएक टमाटरों के दामों में बढ़ोतरी क्या हुई, ग्राहकों की संख्या में भी कमी देखी गयी। बता दें कि महीने भर बाद दामों में कमी हुई है। दुकानदारों का कहना है कि आजकल टमाटर खरीदने के लिए गिने चुने ही ग्राहक आ रहे हैं। माना जा रहा है कि दामों में कमी आएगी तो ग्राहकों की संख्या भी बढ़ेगी।
50 कुंतल से ज्यादा हाेती थी टमाटर की खपत
शहर के अलावा आसपास के कई गांवों में सब्जी में स्वाद और सलाद के रूप में प्रयोग होने वाले टमाटर की खपत भले ही इस समय कम हो रही हो लेकिन दामों में बढ़ोतरी से पहले करीब 50 कुंतल तक टमाटर की बिक्री हो जाती थी। मंडी में एक आढ़त से ही करीब 10 से 12 कुंतल टमाटर की बिक्री हो रही है। आढ़तियों का कहना है कि जैसे ही टमाटर की आवक बढ़ेगी, दाम कम होने के साथ ही बिक्री भी बढ़ेगी।
खर्चे का बहाना बनाकर महंगा बेच रहे टमाटर
बता दें कि मंडी से कम दाम पर खरीदकर महंगे दाम पर टमाटर बेचे जाने के पीछे दुकानदारों का तर्क है कि मंडी से खरीदकर लाने के बाद तमाम तरह के खर्चे आते हैं। साथ ही कई बार सामान भी खराब निकल जाता है। बताते हैं कि कैरेट में तमाम टमाटर दबे, खराब और हरे निकलने की वजह से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी दामों में बढ़ोतरी करनी पड़ती है।