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Lakhimpur Kheri News: रेडियो कॉलर लगे दोनों बाघ दुधवा टाइगर रिजर्व के राडार पर

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लखीमपुर खीरी। मानव-बाघ संघर्ष के दौरान पकड़ने के बाद जंगल में छोड़े गए दोनों बाघ दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) प्रशासन के रडार पर हैं। डीटीआर के अधिकारी इन बाघों की गतिविधियों पर नजर रखे हैं। डीटीआर के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक के मुताबिक, दोनों बाघों की गतिविधियां सामान्य हैं।
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डीटीआर के बफर जोन के मंझरा खैरटिया में बाघों के हमले में चार लोगों की मौत के बाद वन विभाग ने बाघ को पकड़ने का अभियान चलाया गया था। 28 जून 2022 को एक बाघ पिंजरे में कैद हुआ था, लेकिन बाघ की जांच किए जाने पर पता चला कि वह बाघ इंसानों पर हमला नहीं कर रहा था। इसके चलते वन विभाग ने अपना अभियान जारी रखा। इसी दौरान एक बाघिन पिंजरे में कैद हुई। जब बाघिन की बारीकी से जांच की गई तो उसका एक दांत टूटा पाया गया, इससे पुष्टि हुई कि असल गुनहगार बाघ नहीं बल्कि बाघिन थी। इसके चलते बाघिन को लखनऊ चिड़ियाघर भेज दिया गया, जबकि बाघ को रेडियो कॉलर लगाने के बाद 05 जुलाई 2022 को डीटीआर के जंगल में आजाद कर दिया गया।
नवंबर में पलिया रेंज के मरौचा गांव में बाघ के हमले की घटनाएं बढ़ने के बाद वन विभाग ने मौके पर पिंजरा लगाया, लेकिन बाघ पिंजरे में कैद नहीं हुआ। 29 नवंबर को एक बाघिन ट्रैंकुलाइज की गई। स्वास्थ्य परीक्षण और कॉलर आईडी लगाने के बाद इसे भी 30 नवंबर को जंगल में आजाद कर दिया गया। तब से यह दोनों बाघ दुधवा टाइगर रिजर्व की सीमा के अंदर ही भ्रमण कर रहे हैं। हालांकि अलग-अलग जगहों पर ग्रामीण इन रेडियो कॉलर लगे बाघों के देखे जाने की बात कर रहे हैं, जो अफवाह मात्र है।
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पिछले छह माह के अंदर एक नर और एक मादा बाघ को रेडियो कॉलर लगाकर जंगल में छोड़ा गया था। दोनों बाघ डीटीआर के रडार पर हैं। उनकी लोकेशन और गतिविधियों पर बराबर नजर रखी जा रही है। अब तक की रीडिंग के मुताबिक, दोनों बाघों की गतिविधियां पूरी तरह सामान्य हैं।
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- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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