सैदरपुर में भी बुखार ने ली जान
सैदपुर में एमएफ हाईवे के पास रहने वाले मजदूर मोहम्मद छोटे की सात वर्षीय बेटी सना की बुखार से बिसौली के एक नर्सिंग होम में मौत हो गई। परिवार वालों का कहना है कि रात में अधिक तबीयत खराब होने पर उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसे एक सप्ताह से बुखार आ रहा था।
सैदरपुर कस्बे के और भी लोग बुखार से पीड़ित हैं। निजी चिकित्सकों के अलावा सीएचसी की ओपीडी में रोजाना करीब 300 मरीज बुखार के आ रहे हैं। कस्बे के अलावा ग्राम अगेही, उरैना, वियोली, सहाबर खेड़ा, दौलतपुर गौटिया में भी बुखार पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। चिकित्साधीक्षक डॉ. फिरासत हुसैन ने बताया कि बुखार पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है। क्षेत्र में स्वास्थ्य परीक्षण कैंप लगाए जा रहे हैं।
ग्राम हसौरा में चार साल की बच्ची की मौत
म्याऊं ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम हसौरा निवासी नन्हे की चार वर्षीय पुत्री मोहिनी को शुक्रवार को रात तेज बुखार आया था। परिवार वालों ने प्राइवेट डॉक्टर से बच्ची को दवाई दिलवा दी लेकिन उसे फायदा नहीं हुआ। शनिवार शाम मोहिनी की मौत हो गई। ग्राम प्रधान पति नंदू सिंह ने बताया कि पूरे गांव में बुखार फैला हुआ है। कई लोग बीमार चल रहे है।
जिला अस्पताल हो या मेडिकल कॉलेज, इस समय ओपीडी में जो मरीज पहुंच रहे हैं उनमें 60 से 70 प्रतिशत बुखार के हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना की करीब ढाई हजार मरीजों की ओपीडी होती है जिनमें अधिकांश मरीज बुखार के ही होते हैं। ओपीडी में चार फिजीशियन बैठ रहे हैं, तब कहीं वह बुखार के मरीजों को देख पाते हैं।
शनिवार को भी बुखार के करीब एक हजार मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचे। सुबह से लेकर दोपहर दो बजे तक मरीजों की खासी भीड़ लगी रही। कॉलेज के प्राचार्य एनसी प्रजापति ने बताया कि यहां मरीजों का लगातार उपचार चल रहा है। इस समय वायरल की शिकायत ज्यादा है, जिससे बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे हैं।
अजमेर से लौटे युवक की बुखार से मौत
नगर पंचायत निवासी अशरफ (38) पुत्र वन्ने शेख पिछले दिनों अजमेर गए हुए थे। बृहस्पतिवार को वापस आने के बाद उनको बुखार ने अपनी चपेट में ले लिया जिसके बाद रविवार को अशरफ की हालत खराब होने लगी। इसके बाद परिजन उसको बिल्सी और फिर बदायूं ले गए। लेकिन उसकी हालत में सुधार नही होने के कारण उन्हें बरेली रेफर कर दिया। सोमवार को इलाज के दौरान अशरफ ने दम तोड़ दिया।
टीमों ने डोर-टू डोर जाकर खोजे मरीज
उझानी के सकरीजंगल, मानकपुर और बसोमा गांव में बुखार के मरीज सामने आने पर शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर डोर-डू डोर अभियान चलाया। तीनों गांवों में कैंप लगाकर मरीजों को दवाएं वितरित की गईं। बता दें कि सकरीजंगल में पिछले सप्ताह महिला समेत सात लोगों की बुखार से मौत हो चुकी है।
बसोमा में चार साल पहले बुखार का प्रकोप बढ़ा था, लेकिन अब एक बार फिर से करीब 20 मरीज सामने आ गए। मानकपुर में चेकअप के दौरान 15 मरीजों का ब्लड सैंपल लिया गया। चिकित्साधीक्षक डॉ. राजकुमार गंगवार ने बताया कि सकरीजंगल में बुखार के मरीजों की संख्या कम हो रही है। बाहर इलाज करा रहे लोग भी ठीक होकर लौटने लगे हैं।
सीएमओ कर रहे ये दावा
सीएमओ प्रदीप वार्ष्णेय का दावा है कि बुखार की रोकथाम को लेकर इस बार स्थिति काफी बेहतर है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कहीं पर भी बुखार या संक्रामक रोग न फैलें, इसका पूरा प्रयास है और अब तक विभाग इसमें सफल भी रहा है। इसके अलावा जहां बुखार के मरीज मिल रहे हैं, वहां शिविर लगाकर दवाएं बांटीं जा रही हैं साथ ही मरीजों का चेकअप कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बुखार से मौत की सूचना मिलते ही टीम भी भेजी जाती है। अभी तक जो सूचनाएं मिली हैं, उनके बारे में दिखवाकर सोमवार को बताएंगे। इसके अलावा गांवों में यदि सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो जाए तो काफी हद तक बीमारियों पर भी काबू पाया जा सकता है।