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प्राचीन कुएं में गिट्टी डालकर हू-हू की आवाज कर निभाई परंपरा

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भूतनाथ मंदिर परिसर में प्राचीन कुएं पर पूजा करते श्रद्धालु।
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बाबा भूतनाथ मंदिर पर लगा आस्था का मेला
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गोला गोकर्णनाथ। सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को भूतनाथ मंदिर पर आस्था और लोक संस्कृति का विशाल मेला लगा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा भूतनाथ को बेलपत्र चढ़ाकर मनौती की गांठ बांधी और प्राचीन कुएं में गिट्टी डालकर हू-हू की आवाज निकालते हुए लोक परंपरा निभाई।
यह मेला जहां आस्था का प्रतीक है वहीं लोक संस्कृति का भी परिचायक है। यहां मेले में ऐसी वस्तुएं देखने को मिल जाती हैं, जो जिंदगी से बाहर से हो चुकी हैं या फिर कम देखने को मिलती हैं। मेले में लोगों ने रंग बिरंगी बांसुरी, तीर कमान और लाठी, पशुओं के गले में बांधे जाने वाले घंटा-घंटी, पसाई के चावल, लकड़ी के सामान में खासकर खटिया, मचिया (स्टूल), राखियां, हंसिया, खुरपा, खुरपी, चिलम, नारियल के खोल के हुक्के खरीदे, जो और जगह कम ही मिलते हैं।
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वहीं खाने की चीजों में कंदमूल फल, जलेबी, दानेदार बर्फी और नारियल, रबा से बनी गड़बड़झाला मिठाई का स्वाद चखा। वहीं मेले में प्राचीन विशाल पीपल के चबूतरे पर खंजड़ी, हारमोनियम चिमटे की धुन पर ग्रामीण संगीत-भजन और उनकी धुन पर थिरकते ग्रामीण बुजुर्ग आकर्षण का केंद्र रहे ।
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राखो मेरी लाज बंसी बजाने वाले...
बाबा भूतनाथ मंदिर परिसर में जिला पीलीभीत बीसलपुर ईट गांव से आए श्रद्धालुओं ने अपने लोक संगीत से मेले में समां बांध दिया। हारमोनियम चिमटा और खंजड़ी बजाकर भजन गाते हुए राम अवतार, सकटे लाल, राम कुमार, ठाकुर दास, लक्ष्मण प्रसाद, ओमप्रकाश, रामगोपाल आदि बुजुर्ग कलाकारों ने अपने लोक संगीत से लोगों का मन मोह लिया। उन्होंने बताया कि वह करीब 20 वर्षों से भूतनाथ के मेले में भजन कीर्तन करते हैं।
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