सांप के काटने से तीन लोगों की एक माह में हो चुकी है मौत
डॉक्टरों की सलाह- झाड़फूंक कराने के बजाय ले जाएं सरकारी अस्पताल
लखीमपुर खीरी। बारिश का मौसम भले ही भीषण गर्मी से राहत दिलाता हो, लेकिन इसमें सांप के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कारण, बरसाती पानी बिलों में भरने से सांप बाहर निकल आते हैं। ऐसे में ज्यादातर खेतों में काम करने वाले लोग सांपों का शिकार बनते हैं। जिला अस्पताल में बीते माह में ही सांप काटने के 47 पीड़ित आए, जिसमें से कई लोगों की मौत तक हो गई। डॉक्टरों का कहना है कि सांप काटने की स्थिति में तुरंत सरकारी अस्पताल आएं और एएसवी यानी एंटी स्नेक वेनेम लगवाकर मरीज की जान बचाएं।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया बताते हैं कि सर्पदंश के बाद शुरुआती एक घंटे पीड़ित के लिए बेहद अहम होते हैं। पीड़ित को किसी भी हालत में सोने न दें। मरीज को गर्म पानी और काफी पिलाएं। शुरूआती घंटे के भीतर मरीज के एंटी स्नैक वेनम लगने से शरीर को जहर से लड़ने की शक्ति मिल जाती है और पीड़ित के बचने की संभावना बढ़ जाती है।
लक्षण
काटने वाली जगह पर दर्द, सूजन, ऐंठन, अकड़न, कंपकंपी, पलकों का गिरना, जलन, त्वचा के रंग में बदलाव, प्यास लगना, घाव से खून बहना, पसीना आना।
एक माह में सर्पदंश से तीन लोगों की हुई मौत
1. निघासन के गांव गौरिया दीपू पांडे की पत्नी स्वाति (35) को सांप ने काट लिया। इसके कुछ देर बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी। इस पर घरवाले उसको लेकर सीएचसी रमियाबेहड़ लेकर गए। जहां उसे मृत घोषित कर दिया।
2. सीएचसी मितौली के कस्बा कस्ता निवासी वीरू पुत्र रामसहाय (26 वर्ष) खेत में सिंचाई कर रहा था। बोरिंग के पास पहुंचते ही सर्प ने उसे काट लिया। परिजन पहले झाड़फूंक करने वालों के पास और फिर सीएचसी लेकर गए। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
3. सीएचसी मितौली के गांव झाऊपुर निवासी रामकुमार पुत्र दीनदयाल (60 वर्ष) जानवरों के लिए घास लेने खेत पर गए। गन्ने के खेत में घास काटते समय सांप ने काट लिया। पहले घरवाले झाड़फूंक के चक्कर में लगे रहे और बाद में हालत गंभीर होने पर 108 एंबुलेंस से सीएचसी मितौली ले जाकर भर्ती कराया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
सांप काटने पर झाड़फूंक न कराकर सरकारी अस्पताल लेकर आएं, जिससे समय पर एएसवी लगाकर उसकी जान बचाई जा सके। क्योंकि शुरूआत का एक घंटा उसके लिए बेहद अहम होता है। एक घंटे के भीतर वैक्सीन लगने से मरीज की जान बचने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। जिले में एएसवी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
- डॉ. अश्वनी कुमार, एसीएमओ
एंटी स्नेक वेनेम की जिले में कोई कमी नहीं है। डिमांड के अनुरूप हर सीएचसी पर एएसवी उपलब्ध करवा दी गई है। इसके अलावा करीब 250 वैक्सीन अभी भी स्टॉक में मौजूद हैं।
- विनय कुमार, फार्मासिस्ट ड्रगवेयर हाउस राजापुर