रैली निकालकर पहुंचे तहसील, विरोध स्वरूप किया थारु होरी नृत्य
बाद में मुख्यमंत्री को संबोधित सौंपा ज्ञापन एसडीएम को सौंपा
पलियाकलां। अखिल भारतीय वन-जन श्रमजीवी यूनियन के बैनर तले थारु महिलाओं व पुरुषों ने तहसील पहुंचकर वनाधिकारों का मान्यता कानून लागू न होने पर ऐतराज जताते हुए विरोध स्वरूप प्रसिद्ध थारु होरी नृत्य किया।
एसडीएम रेनू को दिए ज्ञापन में कहा गया है कि देश की संसद ने 16 दिसंबर 2006 को अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी वनाधिकारों की मान्यता कानून 2006 पास किया था, जिसका 16 साल बाद भी थारु क्षेत्र के 20 गांवों को लाभ नहीं मिला है। 16 साल से वन विभाग द्वारा कानून के क्रियान्वयन में अड़चनें लगाईं जा रही हैं। इसमें 31 जुलाई 2013 को उपखंड स्तरीय समिति ने लघु उत्पाद के अधिकार के लिए दावे प्रस्तुत किए।
सात साल लंबी प्रक्रिया के बाद 2020 में उपखंड स्तरीय समिति के दावों को पास करके अंतिम अनुमोदन के लिए जिला स्तरीय समिति को अग्रसरित किया गया, लेकिन जिला स्तरीय समिति ने बिना कोई जांच किए 15 मार्च 2021 को दावों को निरस्त कर दिया गया, जो गलत है। मामले में 20 गांवों के पास किए दावों की जांच कराने, निरस्त किए गए दावों का उपखंड स्तरीय समिति द्वारा दी गई रिपोर्ट से पुनरावलोकन करने की मांग की गई है। ताकि आदिवासी समाज को उनका अधिकार मिल सके। इस दौरान सहबनिया, निबादा राना, अनीता, साधना देवी, तेतारा देवी, फूलमती, रतनलाल, प्यारेलाल, दयाराम, रामचंद्र, संतोषी समेत बड़ी संख्या में थारु समाज के लोग मौजूद रहे।