फूलबेहड़ में चुनाव के नामांकन के दौरान हुए बवाल में पूर्व विधायक रामसरन पर लाठी चलाती पुलिस। फाइ
लखीमपुर खीरी। सहकारी समिति के चुनाव में गुरुवार को फूलबेहड़ में हुई घटना ताजा जरूर है, पर नई नहीं है। चुनाव चाहे ब्लॉक प्रमुखी का हो या सहकारी समितियों का, सत्ता की हनक में चहेतों को कुर्सी दिलाने की होड़ में यहां के माननीयों की गरिमा पहले भी तार-तार हुई है।
खास बात ये है कि ऐसी घटनाएं सुर्खियां भी बनीं, पर उनकी पुनरावृत्ति फिर भी हो रही है। पिछले तीन वर्षों में ही ऐसी तीन घटनाएं जिले में हो चुकी हैं, जिनके न सिर्फ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, बल्कि घटनाएं पूरे प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर परी सुर्खियां बनीं। इसमें एक घटना में तो सत्ता पक्ष के ही आरोपितों पर मुकदमा तक दर्ज हुआ, पर न तो माननीयों और न ही पुलिस-प्रशासनिक निजाम ने सबक लिया। इसका नतीजा ये है कि जिले की राजनीति में विवादों का बीज मजबूत हो रहा है। तकरीबन तीन साल और चार महीना पहले 11 अप्रैल 2021 को नकहा ब्लॉक परिसर में हुआ ऐसा ही एक विवाद खूब चर्चा में रहा था।
इसमें बीडीसी के चुनाव को लेकर सदर विधायक योगेश वर्मा और ब्लॉक प्रमुख पवन गुप्ता आमने -सामने आ गए थे। घटना वाले दिन ब्लॉक पहुंचे विधायक पर प्रमुख ने जबरदस्ती बीडीसी का पर्चा खारिज करवाने की कोशिश का आरोप लगाया था। पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी जमकर वायरल हुआ था, जिसमें वहां हुए वाद-विवाद के साथ ही प्रयोग की गई अभद्र भाषा को हर एक ने सोशल मीडिया के जरिये देखा और सुना था।
इसके तीन माह बाद आठ जुलाई को पसगवां ब्लाॅक में प्रमुख पद के चुनाव में नामांकन वाले दिन सपा की महिला उम्मीदवार के साथ अभद्रता की बड़ी घटना हुई थी। इसमें भाजपा की बड़ी नेता के इशारे पर उनके समर्थकों द्वारा घटना को अंजाम दिए जाने का आरोप लगा था। मामले में कई लोगों पर एफआईआर भी दर्ज हुई थी। पुलिस-प्रशासन पर सत्तापक्ष के इशारे पर काम करने के आरोप भी लगे थे। अब फिर इस तरह की घटना हो गई।