लखीमपुर खीरी। जिस विभाग के पास बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने की बड़ी जिम्मेदारी है, वह खुद ही कुपोषण का शिकार है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के पास न तो पर्याप्त सीडीपीओ हैं, न ही सुपरवाइजर। स्टाफ के अभाव में काम प्रभावित हो रहा है।
बाल विकास विभाग शासन की प्राथमिकता वाला विभाग है। इसकी नियमित निगरानी होती है। ऐसे में स्टाफ मजबूरी में जैसे-तैसे काम चला रहा है। जनपद में 15 ब्लॉक के सापेक्ष 16 सीडीपीओ होने चाहिए, लेकिन पांच ही तैनात हैं। 11 सीडीपीओ के पद रिक्त हैं। इन पांच सीडीपीओ से 16 का काम लिया जा रहा है।
एक-एक सीडीपीओ पर दो से तीन ब्लॉक की जिम्मेदारी है। सुपरवाइजरों की भी कमी है। 116 सुपरवाइजर होने चाहिए, लेकिन मात्र 27 तैनात हैं। प्रधान सहायक के 11 में चार, कनिष्ठ सहायक के 18 में चार और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 16 पदों में 11 तैनात है। जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉक तक स्टाफ का टोटा है। संवाद
जनपद में लाभार्थियों की संख्या
छह माह से तीन वर्ष तक बालक- 123475
छह माह से तीन वर्ष तक बालिकाएं- 108166
तीन से छह साल तक बालक- 103111
तीन से छह साल तक बालिकाएं- 94261
गर्भवती- 48396
धात्री- 26718
जिले में कुल लाभार्थी- 5.04 लाख
-
पद का नाम- स्वीकृत पद- रिक्त पद
सीडीपीओ- 16- 11
सुपरवाइजर- 116- 89
प्रधान सहायक- 11- 07
कनिष्ठ लिपिक- 18- 14
चतुर्थश्रेणी- 16- 5
स्टाफ कम है, यह बात सही है। जिसकी वजह से काफी दिक्कतें होती हैं, लेकिन फिर भी बेहतर काम करने की कोशिश रहती है। स्टाफ बढ़ाने के लिए शासन तक को पत्र भेजा जा चुका है।
भारत प्रसाद, जिला कार्यक्रम अधिकारी