बांकेगंज। तेज बारिश और उसके बाद आई बाढ़ से नदियां ही नहीं नाले-नालियां, झीलें और तालाब उफना उठे हैं। बाढ़ के पानी में बहकर मगरमच्छ नदियों से तालाबों और आबादी में आने लगे हैं। आबादी के अंदर जल-स्त्रोतों में मगरमच्छों ने बसेरा बना लिया है। ऐसे में इंसान और पालतू पशु शिकार हो रहे हैं। पिछले 15 दिन के अंदर जिले में 10 से अधिक लोग मगरमच्छों के हमले में घायल हुए हैं।
बाघ और तेंदुओं के बाद अब मगरमच्छ इंसानों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। बाढ़ के पानी के साथ तालाबों, खेतों और जलभराव वाले रास्तों पर यह मगरमच्छ इंसानों को खींचकर निवाला बना रहे हैं या उन्हें घायल कर रहे हैं। बाढ़ आने के बाद एक तरह से जिले में मानव-मगरमच्छ के बीच संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई है।
जिले का अधिकांश क्षेत्र जलमग्न होने की वजह से जलस्त्रोतों के आसपास मगरमच्छों की मौजूदगी से इनके हमले का खतरा बढ़ गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन डीएफओ सौरीष सहाय ने नागरिकों को आगाह किया है कि यदि किसी व्यक्ति को जलस्त्रोतों के आसपास मगरमच्छ या अन्य वन्यजीव दिखाई दें तो उसकी सूचना तुरंत वन चौकी, रेंज कार्यालय या जिला मुख्यालय को दें। ताकि समय पर वन विभाग जरूरी कार्रवाई कर सके और लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठा सके। उन्होंने जलस्त्रोतों और जलमग्न क्षेत्रों आते-जाते समय पूरी सतर्कता बरतने को कहा है। यह भी कहा है कि अनावश्यक रूप से जलस्त्रोतों के आसपास जाने से बचें।