निघासन। बालिका को अगवा करने के आरोपी ने सिंगाही थाने के हवालात में जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया। हालत बिगड़ने पर पुलिस के होश उड़ गए। जिला अस्पताल के बजाय शहर के किसी निजी अस्पताल में आरोपी का इलाज कराया जा रहा है। हालांकि पुलिस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
26 नवंबर को लखीमपुर के गढ़ी रोड निवासी एक व्यक्ति ने सिंगाही थाने में तहरीर दी थी कि वह 23 नवंबर को परिवार सहित मजदूरी करने बेलरायां आए थे। गढ़ी रोड के ही निवासी अरविंद सिंह भी अपने परिवार के साथ यहीं काम करने आए थे। 24 नवंबर को अरविंद उसकी आठ वर्षीय मानसिक मंदित बेटी को अगवा कर ले गया। पुलिस ने अरविंद सिंह के खिलाफ अगवा करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की।
बताया जा रहा है कि सिंगाही पुलिस बृहस्पतिवार की रात अरविंद को हरिद्वार से पकड़कर थाने ले आई। शुक्रवार सुबह अरविंद की हालत देखी तो पुलिस के हाथपांव फूल गए। आरोपी अरविंद बार-बार शौच और उल्टी कर रहा था। पेट पकड़कर दर्द से छटपटा रहा था। हालत लगातार बिगड़ती देख पुलिस अरविंद को लेकर निघासन सीएचसी पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। मामले को छिपाने में जुटी पुलिस उसे जिला अस्पताल न ले जाकर किसी निजी अस्पताल में इलाज करा रही है।
वहीं, अरविंद के परिजनों का आरोप है कि थाने के लॉकअप में अरविंद की इस कदर पिटाई की गई कि उसने लॉकअप में ही कोई जहरीला पदार्थ खा लिया।
सीओ बाहर, एसओ छुट्टी पर.. घटना से इन्कार
सीओ यादवेंद्र ने बताया कि वह बाहर हैं। थानाध्यक्ष जितेंद्र बहादुर सिंह ने अवकाश पर होने की बात कही। मामले को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसके पेट में दर्द उठा था। इसीलिए लेकर गए थे। जबकि निघासन सीएचसी प्रभारी डॉ. पीके रावत ने बताया कि पुलिसवाले एक व्यक्ति को लेकर आए थे। वह जहरीला पदार्थ खाने का संदिग्ध मरीज था। विषाक्त पदार्थ खाने के बारे में जांच के बाद ही स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है। हालत खराब होने की वजह से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।