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बाढ़ की विभीषिका : न खाने का ठिकाना, न ठहरने का

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बाढ़ में नष्टहुई धान की फसलको दिखाता किसान जाहिद और गुड्डू।संवाद
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तिकुनिया। मोहाना नदी के किनारे वर्षों से आबाद करीब एक दर्जन गांवों के लोग बार-बार बाढ़ की विभीषिका झेलकर संकट में आ गए हैं। खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से फसलें नष्ट हो चुकी हैं। ग्रामीणों के न तो खाने का ठिकाना है और न ही ठहरने का। बाढ़ पीड़ितों के सामने आजीविका का संकट मंडरा है। प्रभावित क्षेत्रों मेें अब तक दवा का वितरण नहीं किया गया है। कई दिन से गांव में पानी भरा होने से लोग छतों पर डेरा जमाए हैं।
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किसानों ने बताया कि धान की बाली निकालने वाली थी। इसी बीच खेतों में पानी भर गया। पानी भरने से फसलें नष्ट हो गईं हैं। नया पिंड जसनगर गांव के बनवारी लाल सहित अन्य लोगों ने बताया कि मोहाना नदी ने इस बार जबरदस्त कटान किया है। इसके चलते सात-आठ सौ किसानों की जमीन नदी में चली गई। वहीं जसनगर से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर नया पिंड गांव है।
यहां नदी ने आधे गांव को चपेट में ले लिया है। नदी नानपारा-मैलानी रेलवे ट्रैक के किनारे तक पहुंच रही है। इसके चलते रेलवे ट्रैक को भी खतरा है। एसडीएम निघासन राजीव निगम ने बताया कि जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उनका नाम लिखकर उन्हें मुआवजा दिलाया जाएगा। जिन लोगों के नाम छूट गए हैं। उनको भी मुआवजा मिलेगा। बाढ़ पीड़ितों के दवा, पानी और राशन की व्यवस्था की जाएगी।
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