देवकली में बने 12 ज्योतिर्लिंग और शिवजी की विशाल प्रतिमा।संवाद
फरधान। देवकली का देवेश्वर नाथ मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। नागपंचमी के दिन कालसर्प योग के निदान के लिए देवकली का विशेष महत्व है। तीर्थ स्थल पर प्रत्येक वर्ष विशाल मेला लगता है। नागपंचमी के दिन काल सर्प योग शांति महायज्ञ होता है।
देवकली के बाबा देवेश्वरनाथ मंदिर में प्रत्येक वर्ष नागपंचमी पर भक्त दर्जनों शिवलिंगो के पास कालसर्प दोष मुक्ति के लिए सामूहिक हवन करवाते हैं। इस वर्ष भी श्रावण शुक्ल नाग पंचमी को श्रीमती चंद्रकला आश्रम-संस्कृत विद्यापीठ की ओर से कालसर्प योग शांति महायज्ञ का आयोजन किया गया। यहां के देवतीर्थ में गोदावरी नदी से जल लाकर प्रतिष्ठित करवाया गया था।
उसके साथ त्र्यंबकेश्वर सहित द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना कराई गई थी। कालसर्प योग दोष शांति के लिए मुख्य स्थान नासिक है। उसके बाद देवकली तीर्थ स्थल की भी बहुत मान्यता है। बताया जाता है कि देवकली में राजा परीक्षित के पुत्र राजा जन्मेजय ने सर्प विनाश यज्ञ किया था। सर्पों के भांजे आस्तिक मुनि ने राजा जन्मेजय से तक्षक नाग की आहुति दान में मांगकर संपूर्ण सर्प जाति को बचा लिया था।
तभी से देवकली तीर्थ स्थल से सर्पों का विशेष लगाव हो गया। यज्ञ करने वाले कुंड में नाग पंचमी के दिन स्नान करते हैं। कुंड की मिट्टी घर ले जाते हैं। इससे सांप घर में प्रवेश नहीं करते हैं। संवाद
देवकली में बने 12 ज्योतिर्लिंग और शिवजी की विशाल प्रतिमा।संवाद