धनगढ़ी-नेपाल बार्डर पर बना शांति पुर्नस्थापना का कार्यालय। संवाद
गौरीफंटा। मानव तस्करी रोकने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर आधा दर्जन संस्थाओं के साथ ही सुरक्षा एजेंसियां तैनात हैं। इसके बावजूद दलालों के जरिये नेपाल से भारत के रास्ते नेपाली युवतियों को खाड़ी देशों में भेजने का सिलसिला जारी है। बीते साल 473 युवतियों को बचाया गया है। जबकि, सात मुकदमे दर्ज किए गए हैं। ऐसे में बॉर्डर पर मानव तस्करी रोकना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।
बॉर्डर पर तैनात शांति पुनर्स्थापना की संयोजक कैलाशू राना ने बताया कि सन् 2023 में भारत ले जाई जा रही करीब 344 युवतियों को बचाया गया है। पांच पर कैलाली जिला पुलिस कार्यालय में केस दर्ज किया गया है। वहीं 339 युवतियों को उनके परिजन के सुपुर्द किया गया है। नेपाली संस्था माइती नेपाल के संयोजक शिवचरण ने बताया कि वर्ष 2023 में जनवरी से दिसंबर माह तक 129 युवतियों को बचाया है। दो पर केस दर्ज किया गया है।
इन क्षेत्रों से लाई जाती हैं युवतियां
नेपाल के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र डोटी, बाजुरा, बझांग, आछाम, सिंधूपाल, गोरखा, पालपा, साल्यान, सिंधुली, सर्लाही आदि से युवतियों को लाकर भारत के महानगरों और फिर खाड़ी देशों में भेजने का गोरखधंधा किया जाता है।
मानव तस्करी के लिए एसएसबी काफी गंभीर है, जो कि सीमा पर बराबर नजर रखे हुए है। किसी पर भी शक होने पर एसएसबी महिला विंग की जवान जानकारी करतीं हैं। पकड़ी गई युवतियों को नेपाल पुलिस व नेपाल के एनजीओ के सुपुर्द किया जाता है।
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