उचौलिया/मंहगापुर। पिता का साया साथ हो दुनिया सलाम करती है, अन्यथा अपनी परछाईं भी साथ छोड़ देती है। आज फादर्स डे पर जिले के कुछ ऐसे ही संघर्षशील लोगों की दास्तां सामने आई है, जिन्होंने विपरीत हालात के बावजूद अपने हौसलों से अपने बच्चों को उनके सपनों की उड़ान भरने में कामयाबी दिलाई। उचौलिया निवासी 65 वर्षीय जसवंत सिंह ने जहां ट्रक चलाकर अपने बेटों को सीएस और सेना में लांसनायक बनाया तो वहीं महंगापुर के रामप्रताप शर्मा ने मजदूरी कर अपने बेटे को पीसीएस अफसर बनाया। क्षेत्र की जनता फौलादी इरादों वाले इन पिताओं के हौसले को आज भी सम्मान करती है।
मजदूरी कर बेटे को बनाया पीसीएस अधिकारी
महंगापुर। पलिया के त्रिकोलिया गांव निवासी रामप्रताप शर्मा ने मेहनत मजदूरी करते हुए अपने बेटे डॉ कमल रवि शर्मा को पीसीएस अधिकारी बनाया। उनके दो बेटियां और एक बेटा है। कोई पैतृक संपत्ति नहीं है। काम बढ़ई का करते हैं। 2010 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद बेटे कमल रवि शर्मा को चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर में दाखिला दिलाया। फीस ज्यादा थी, लेकिन कभी पैसों की कमी बेटे की पढ़ाई के आड़े नहीं आने दी। बेटे ने बीएससी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए विश्व विख्यात बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से एमएससी की और पीएचडी की उपाधि वर्ष 2021 में प्राप्त की। उनके बेटे डॉ कमल रवि शर्मा के कई रिसर्च पेपर विदेशी जर्नलों में प्रकाशित हो चुके है। पीएचडी करते वक्त 2020 में उनके बेटे ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और वह वर्तमान में अपर जिला कृषि रक्षा अधिकारी के पद पर सिद्धार्थनगर जिले में कार्यरत हैं।
ट्रक चलाकर पाला परिवार, एक बेटे को सीएस, दूसरे को बनाया लांसनायक
उचौलिया। कस्बा की नई बस्ती निवासी 65 वर्षीय सरदार जसवंत सिंह पेशे से ट्रक चालक हैं। उनका जन्म पंजाब के फिरोजपुर जिले में हुआ था। सन् 1981 में दादा के साथ पूरा परिवार यूपी में लखीमपुर आ गया। इसके बाद उन्होंने 1982 में ट्रक चलाना शुरू किया। 1988 में शादी हुई। फिरोजपुर से हाईस्कूल पास जसवंत सिंह ने बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया। बड़े बेटे गुरुप्रीत को प्रारंभिक शिक्षा के बाद शाहजहांपुर में पढ़ाया। एसएस कालेज से बीकाम की पढ़ाई के दौरान ही सीएस की तैयारी कराई। सन् 2015 में गुरप्रीत सिंह ने सीएस की डिग्री हासिल की। वह इस समय ग्रेटर नोएडा में निजी प्रैक्टिस कर रहा है।
उधर, छोटे बेटे कुलदीप को भी शाहजहांपुर के रोजा में दाखिला दिलाया। इसके बाद उसका चयन सन् 2013 में भारतीय सेना में हो गया। इस समय वह लांसनायक के पद पर श्रीगंगानगर राजस्थान में तैनात है। जसवंत सिंह ने बच्चों की शादी कर दी है। विपरीत हालात में अपनी मेहनत के सवाल पर वह शर्मा जाते है, और कहते हैं जो कुछ भी है, सब रब का शुकर है।