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Lakhimpur Kheri News: धौरहरा सीट कांग्रेस के लिए छोड़ सकती है सपा

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लखीमपुर खीरी। लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनावों को लेकर प्रदेश में सीटों के बंटवारे पर ट्वीट क्या किया, जिले में सियासी भूचाल आ गया। राजनीतिक दलों समेत हर ओर बस यही चर्चा रही कि लोकसभा की दो सीटों खीरी और धौरहरा पर आखिर दावेदारी किसकी होगी। उधर, समाजवादी सूत्रों के मुताबिक सपा मुखिया अखिलेश यादव का पूरा जोर खीरी पर है, सपा धौरहरा सीट कांग्रेस के लिए छोड़ सकती है।
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रविवार को अखबारों में प्रकाशित अखिलेश के एक बयान से ठंड से कंपकंपाते खीरी वासियों की जुबान पर सियासी सरगर्मियों की चर्चा रही। सत्तारूढ़ दल के नेता भी अपनी पक्की दावेदारी और जीत सुनिश्चित करने के लिए यही गुणाभाग करते रहे कि खीरी की सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा। बड़ा कारण यह भी कि चार दिन पहले ही सपा ने एक कार्यक्रम कर लोकसभा चुनावों के लिए हुंकार भरी थी। खीरी संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव के लिए उत्कर्ष वर्मा को प्रभारी बनाया था, जबकि धौरहरा सीट पर आनंद भदौरिया को प्रभारी नियुक्त किया।



साथ ही कार्यकर्ताओं से चुनावों में जुट जाने का आह्वान किया, लेकिन शनिवार को सीट बंटवारे पर आए अखिलेश यादव के कांग्रेस को महज 11 सीटें देने के बयान ने जिले की सियासत को अलग रुख दे दिया है। हालांकि, दोनों दलों के जिम्मेदार आधिकारिक प्रतिक्रिया देने से बचते रहे, लेकिन अखिलेश दरबार तक पहुंच रखने वाले पार्टी सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी धौरहरा सीट कभी नहीं जीती है, इसलिए 90 फीसदी संभावना है कि यह सीट कांग्रेस के लिए खाली कर दी जाए। संवाद
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2009 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई धौरहरा सीट

2008 में परिसीमन से पहले जिले में लोकसभा की एक ही सीट थी, लेकिन परिसीमन के बाद पहली बार धौरहरा लोकसभा सीट अस्तित्व में आई। इसमें आधा लखीमपुर का तो आधा सीतापुर जिले का हिस्सा है। खीरी से जहां इस निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत कस्ता, मोहम्मदी और धौरहरा विधानसभा क्षेत्र हैं, तो सीतापुर जिले से महोली और हरगांव विधानसभा क्षेत्र। जबकि खीरी संसदीय क्षेत्र में जिले के ही पांच विधानसभा क्षेत्र सदर, गोला, श्रीनगर, निघासन और पलिया शामिल हैं। 2009 में अस्तित्व में आई नई सीट धौरहरा पर जब पहली बार आम चुनाव हुए तो कांग्रेस से जितिन प्रसाद ने बंपर वोटों से जीत हासिल की और यूपीए-2 में मंत्री बने। उसके बाद से अब तक धौरहरा सीट पर तीन बार चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 2014 और 2019 के चुनावों में मोदी लहर के आगे जितिन प्रसाद को हार का मुंह देखना पड़ा। 2014 के चुनाव में यहां कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी। 2009 के चुनाव में सपा धौरहरा में तीसरे नंबर पर थी, 2014 में भी तीसरे नंबर पर थी। हालांकि 2019 के चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन में बसपा दूसरे नंबर पर थी। ऐसे में हालात बनते हैं कि सपा कांग्रेस के लिए धौरहरा सीट छोड़ सकती है।





18 जनवरी को लखनऊ में हुई बैठक में खीरी सीट पर अखिलेश का रहा जोर

लखीमपुर खीरी। 18 जनवरी को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जिला इकाई की लखनऊ में बैठक कर साफ संदेश दिया था कि लखीमपुर की दोनों सीटों पर चुनाव लड़ना प्राथमिकता है, लेकिन खीरी लोकसभा सीट पर वह कोई समझौता नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी कार्यकर्ताओं व बड़े नेताओं से भी अखिलेश यादव अक्सर पूछते रहे हैं कि भाजपा के सांसद को खीरी में कौन हरा सकता है। इसीलिए उत्कर्ष वर्मा को भी आगे किया गया, जबकि इसी बात से नाराज होकर पार्टी में महासचिव रहे रवि वर्मा ने सपा का दामन छोड़ कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया। समाजवादी सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश यादव के लिए खीरी संसदीय सीट अब नाक का सवाल बन गई है, जिसे वह किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।





कांग्रेस बोली- हमारा दावा 25 सीटों पर है



अखिलेश के सीट बंटवारे के बयान पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य डॉ. रविशंकर त्रिवेदी का कहना है कि अभी सौहार्दपूर्ण और अच्छे माहौल में बातचीत चल रही है। हमें उम्मीद से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। उधर, जिलाध्यक्ष प्रहलाद पटेल का कहना है कि अंतिम निर्णय बाकी है। हमारा दावा दोनों सीटों पर है, आलाकमान का निर्णय अंतिम होगा।





हमारे पास दोनों सीटें- सपा

सपा जिलाध्यक्ष रामपाल यादव का कहना है कि जो 11 सीटें कांग्रेस को देने की बात कही जा रही है। उसमें खीरी पर सपा का लड़ना तय है। धौरहरा पर भी हमने प्रभारी घोषित किया है, लेकिन अंतिम निर्णय आने में समय है।
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