लखीमपुर खीरी। ढाई लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य लेकर तीन अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद का सफर अभी आधे रास्ते भी नहीं पहुंचा है। एक तरफ आढ़तें जहां दिनभर गुलजार रहती हैं, सरकारी केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। इसके बावजूद शाम होते-होते हर केंद्र अच्छी धान खरीद होने का दावा करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर शाम को अचानक खरीद कैसे हो जाती है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पांच कंपनियों के कुल 169 सेंटरों पर करीब एक लाख मीट्रिक टन धान की खरीद अब तक हो सकी है। सरकारी केंद्रों का हाल ये है कि कर्मचारी दिन भर किसानों का इंतजार करते हैं। कोई भूला-भटका किसान अपना धान तुलवा ले तो ठीक वरना दिनभर कोई खरीद नहीं होती है। अभी तक 11,410 किसानों से 1,04,959 मीट्रिक टन धान खरीद का अफसर दावा कर रहे हैं। सेंटरों पर सन्नाटा होने के बाद भी आखिरकार तौल कब और कहां से हो रही है, यह बड़ा सवाल है। धान खरीद से जुड़े अफसर भी इस सवाल का जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
सबसे ज्यादा एफसीएस तो सबसे कम एफसीआई ने खरीदा धान
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अभी तक एफसीएस एजेंसी ने सबसे ज्यादा 6154 किसानों से 52490 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। वहीं एफसीआई एजेंसी ने महज 41 किसानों से 189.52 मीट्रिक टन ही धान खरीदा है। यह आलम तब है, जब डीएम से लेकर खाद्य आयुक्त और मंत्री तक धान खरीद बढ़ाने और हर हाल में लक्ष्य को पूरा करने के निर्देश दे रहे हैं।
आंकड़े छुपाने में माहिर है सरकारी मशीनरी
जिला प्रशासन से लेकर डिप्टी आरएमओ कार्यालय से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी धान खरीद का सही आंकड़ा देने से बचते नजर आ रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि सही आंकड़ा छुपाकर ही सरकारी तंत्र हर सेंटर पर खरीद दिखा रहा है। इसमें किसानों के रजिस्ट्रेशन से लेकर भुगतान तक का तमाम डाटा कागजों पर मनमुताबिक भरा जा रहा है।
कुल किसान, क्रय एजेंसी, धान खरीद
41 एफसीआई 189.52 मीट्रिक टन
6154 एफसीएस 52490 मीट्रिक टन
2922 पीसीएफ 24600 मीट्रिक टन
2700 यूपीसीयू 22794 मीट्रिक टन
593 यूपीएसएस 4886 मीट्रिक टन
सरकारी धान खरीद केंद्र पर सन्नाटा स्रोत:संवाद